साहित्य

लघुकथा

 हे राम…..!  “सुधा ! मैं अपने दोस्तों के साथ जाकर पटाख़े खरीद लाया हुँ। आज मैं बहुत खुश हुँ। राम मंदिर की नींव रखी जा रही है।  तुम्हे पता है मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम मेरे प्रिय आराध्य है।” “हम्म….! पटाख़े वहाँ टेबल पर रख दीजिये ।” “सुधा तुम बड़ी नास्तिक हो ! ज़रा बाहर जाकर देखो, […]

साहित्य

” हिंदी साहित्य में प्रेमचंद जी का कद काफी ऊंचा है”महान उपन्यासकार और कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती हर साल हम लोग 31 जुलाई को मनाते हैं ।

दोस्तों प्रेमचंद की कहानियां समाज की सच्चाई का सामना करती है और सत्य, न्याय और निष्ठा के महत्व को रेखांकित करती है। प्रेमचंद की कहानियों का मुख्य उद्देश राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों के बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा करना रहा था। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी से सटा हुआ लमही गांव में इनका […]

साहित्य

कौआ को हार्ट अटैक

मैं जैसे ही स्नानागार में घूसा स्नान करने के लिए तो स्नानागार के बाहर एक कौआ पेड़ पर बैठकर कांव कांव कर रहा था। तो मैं स्नानागार से बाहर निकला तो देखा एक कौआ अमरुद के पेड़ पर बैठकर कांव कांव कर रहा रहा है। हमसे कुछ बोल रहा है। पर उसकी आवाज मुझे समझ […]

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रक्षाबंधन

दीदी जल्दी करो स्कूल के लिए बहुत देर हो रही है राजू ने अपनी बहन कमला को आवाज़ देते हुए बोला।दो मिनट रुक जा समीज की सिलाई उधड़ गई उसे सी रही हूँ, कमला ने राजू के बातों का जबाब देते हुए कहा।अरे ये क्या दीदी हर दो दिन के बाद तुम्हें सिलाई करनी पड़ती […]

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कहानी

खानदानी गली के आखिरी मुहाने पर बसे थे बन्ने मियां। उनका घर जब बना तब आगे इतने घर नहीं खड़े थे। न… न बन्ने मियां के रहने के ठिकाने को घर कहना, उनकी तौहीन के समान हुआ। उनकी तो बाकायदा हवेली खड़ी थी। ये बात दीगर थी कि वक्त की बेरहम मार ने जगह जगह […]

साहित्य

दिल के रिश्ते

“अरे वाहः रीना आज तो बड़ी प्यारी लग रही हो”  रक्षाबंधन वाले दिन मैं अपने मायके से वापिस आयी ही थी कि रीना मुझे बाहर ही मिल गयी। चटक हरे रंग के लहंगा चोली और मांग टीका लगाए  सजीधजी आज तो वो बिल्कुल अलग और बहुत सुंदर दिख रही थी।’हांजी आंटी मैं भी अभी आयी […]

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लघुकथा

      *माटी की राखी* 6 वर्षीय मुनिया बारिश रुकते ही अम्मा के पीछे-पीछे घूम रही थी. अम्मा ने भय्यू को वहीं अंदर झोपड़ी में सुला रखा था .वह जल्दी-जल्दी सभी माटी के बर्तन सुराही मटके कुल्लड़ समेट रही थी. तभी सड़क किनारे एक ठेलेवाला गुजरा उसके ठेले पर रंग बिरंगी डोरन वाली राखियां देख मुनिया […]

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बाल कहानी

                   शाम का भूला नदी किनारे एक जामुन का पेड़ था। पेड़ पर बहुत से पक्षी रहते थे।सबका रहने का अपना-अपना ढंग था। किसी का घोंसला बहुत ही सुन्दर था तो किसी का बस सामान्य, परन्तु सब को अपना घर प्यारा था।  जहाँ चार बरतन होते हैं वहाँ खटपट की आवाजें आती ही हैं। यहां […]

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लघुकथा

 आभासी दुनिया का प्यार             फेसबुक पर लोगों से दोस्ती आम हो गई है। इसी तरह अनुपमा और विजय की मुलाकात भी फेसबुक पर हुई थी। बात करते-करते दोनों में दोस्ती हो गई। एक ही शहर में रहने के कारण दोनों ने मिलने का तय किया।               उनकी मुलाकात ठीक रही। पर अनुपमा को विजय […]

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चुहिया से दोस्ती

   हॉस्टल में छुट्टी चल रही थी सभी लड़कियां अपने अपने घर को जा चुकी थी. छुट्टी खत्म होने ही वाली थी कि महामारी फैलने का आगाज हुआ और अचानक से पूरे देश को लॉक कर दिया गया इस वजह से मुझे कई महीनों तक घर में ही रुकना पड़ा. लोकडाउन खुलते ही मैं वापस […]