काव्य ग़ज़ल

हमसब उसके बन्दर है

ना जाने कब छुटकारा, मिलेगा इस महामारी से। स्वास्थ्यकर्मी और वर्दीवाले, हुए ग्रसित बीमारी से। कोई मर रहा भूख से, तो कोई किसी लाचारी से। कोई फसा है दूर देश, कोई कैद घर की दिवारी से। घर बैठे मजदूर उनकी अब, बेरंग दुनियादारी है। भगा दिया उन सेठों ने, ईनके सर बेरोजगारी है। क्या पालेंगे […]

काव्य ग़ज़ल

कब तक पोंछते रहेंगे नाक !—-

                                 डॉ एम डी सिंह    महराजगंज ——————————————————————————————————डरने की कोई सीमा होगी मरने का कोई अंत तो होगा कितना डरें हम कितनी बार मरें हमअसीमित डर अंतहीन मृत्यु आगे पीछे साथ साथनिरपेक्ष भाव सापेक्ष जीवनके हमसे आशाइत लोगोंसापेक्ष रहें तो लांघें कैसे निरपेक्ष रहें तो जीतें […]

काव्य ग़ज़ल

ग़ज़ल

             कोई ख़ुदा का क़हर कोई बला नहीं है ।              यह इंसानी ज़हर है जलजला नहीं है ।।              इंसानो से मिलिए जरा दूर-दूर रह कर ।              कुछ पल ही नसीहत है फासला नही है ।।              तनहा सी रातें यह दहशत भरे दिन ।              यह रात का अंधेरा अभी टला नहीं […]

काव्य ग़ज़ल

कल होगा कुछ खास

*****************आज और कल की चिंता मेंचिंतित है मन आजलौटेंगे वो दिन कभीमन में है विश्वास..।। जीत सुनिश्चित हार सेसफल हुए से हारहार-हार कर सीख लोफिर होगे तुम पास..।। वक़्त आज नाजुक भलेपर हिम्मत न हारधैर्य और साहस में हैजीवन की फिर आस..।। हर परिणाम सुखद होता हैमुश्किल से जब अर्जित होआज अगर दुःख सह लोगे […]

काव्य ग़ज़ल

आंखें…

दिल के भेद खोलती, गहरे राज छिपाती, दर्द बयां करती, अपनों की पहचान कराती,  हर कोई नहीं समझ पाता, इन आंखों की भाषा, छिपी है इनमें प्यार, मुस्कान,वफ़ा की परिभाषा। रोक रखती है न जाने कितने जज़्बात, देती हर पल अहसासो की सौगात, सुख दुःख की साथी, हर किसी को पढ़ाती जीवन की पोथी। कभी […]

काव्य ग़ज़ल

साँसे

कभी तो मुझे साँस लेने दे, ठहरे आँसू अब बहने दे, जब बचपन ही जल गया तो, इस जवानी को भी जल जाने दे। बिती यादे को भूलने दे, सपनो को अब जगह मिलने दे, तन पर कफ़न सी हैं दुनिया, अभी तो मुझे साँस लेने दे। भुजाओं में बल बढने दे, ठंडे पड़े खून […]

काव्य ग़ज़ल

मज़दूर हूँ मैं

एक मज़दूर के हाथों में ही , इस धरा का जीवन टिका हुआ, दो जून की रोटी के खातिर, स्वजीवन जिनका बिका हुआ। वज्र देह और कर्मठ है जो, क्यों खुशहाली उनसे दूर है, जो बड़े-बड़े महल बनाए, खुद सड़क पर रहने को मजबूर है। जेठ की दोपहरी में जब हम, ए.सी की हवा खाते […]

काव्य ग़ज़ल

भगवान बचाए रखना

भटक चुका है कितना बचपन,भगवान बचाए रखना, हाथों में है मोबाइल,सिगरेट,गन भगवान बचाएl रोती हैं बेबस कितनी सीते और द्रोपती अब भी, घूम रहे दुर्योधन रावण,दु:शासन,भगवान बचाए रखनाI गलियों में निर्वस्त्र घुमाया इक अबला को मिलकर सबने , घोषित कर के उसको डायन,भगवान बचाए रखनाI सड़कों से संसद तक जा पहुंचे जेबकतरे जितने थे, जेलों […]

काव्य ग़ज़ल

“हार कहां हमने मानी है”

वो काँटे पथ में बोते रहे हम जीवन भर हीं ढोते रहे भले शोणित बह आया पग से हम बस मंजिल के हो‌ के रहे बस आगे बढ़ते आए हैं आगे बढ़ने की ठानी है। हार कहां हमने मानी है। जब तम में दिनकर छिप जाते प्राणों का अपना दीप जला वह जल कर बुझने […]

काव्य ग़ज़ल

प्यार के गीत

दिल के कोरे कागज पर कोई, गीत नया सा लिखूं कोई। लिखूं तुमको,या अपनी जिंदगानी लिखूं, लिखा है तुमको गीतों, ग़ज़लों में, ज़र्रा ज़र्रा गाया है, हर शब्द लिपटे है हमसे , फिर कागज पर उतर आया है है। तुमको अपना इश्क लिखूं,या अपनी जिंदगानी लिखूं? बादल, बारिश, नदियां,झील , समंदर, सबसे तेरा श्रृंगार लिखूं। […]