काव्य ग़ज़ल

हम सबके पालनहार

मुरली मनोहार,बन्सी बजैया माखन चोर, कहलाते हो चतुर्भुज, पीताम्बर धारी जग्गनाथ महाराज हों देवकी नन्दन, द्वारकाधीश लक्ष्मी प्रिया, गोविंदा हो कमल नयन और त्रिपुरारि केशव, लक्ष्मी कान्त हो मैया की आंखों का तारा राधा का तुम काजल हो मीरा के विष का प्याला हर अबला की तुम लाज हो नन्द का लाला, गोकुल का ग्वाला […]

काव्य ग़ज़ल

कहानी

एक प्रेमकथा  का अन्त उसका पत्र मिला मुझे, बहुत अवसाद भरा । ” मैं  जिन्दगी से निराश हो गई हूँ अब। जीने की इच्छा खत्म हो गई है, पर अपनी अनुभा  का मुंह देखती हूँ तो ? मेरे बाद क्या होगा इसका ? जीवन ने जैसे  खुशी से नाता तोड़ लिया है । क्या तू […]

काव्य ग़ज़ल

व्याकुलता

रूप   विलीन   भयऊ    जब  ते, कछु  नाहि   रही  अब  चेतनता। सुधि नाहि रही  तन औ  मन की, मनमीत   मिलन   की  आतुरता। जब ते या  दृगन मे  समाय  गयो, दॄग   ने   तज   दीनी   चंचलता। अति  पीर  उरहि  उर  धारति  है, ह्वै  समाय  गयो   उर  मे  दृढ़ता। सुधि सांझ सबेर  की  नाहि  रही, तन  छाय   रही   है  […]

काव्य ग़ज़ल

जय श्री कृष्ण कन्हैया

जय श्री कृष्ण कन्हैया आप हर दिल में बचया । आप हो जग रखवाले देवकीनंदन कृष्ण कन्हैया ।। जब तुम बजाओ हो मूरली, बहती है राग की रसधारा । जग झूम उठता है मेरे बाल गोपाला ले नाम तुम्हारा ।। सांवला सी है देह तुम्हारी, देखो तो नजर नहीं हटती । बस आंखों के आगे […]

काव्य ग़ज़ल

लाॅक डाउन का सबक..

 धरती से अम्बर तक देखो,  विहँस रहीं है दसों दिशाएँ।  नदियों में कल-कल निर्मल जल,  पर्यावरण की खुली शिराएँ।  दमक उठे हिम शिखर दूर से,  नील गगन और झिलमिल तारें।  वन प्रान्तर में  घूमें जीव सभी,  हो निर्भय स्वच्छंद उन्मुक्त नज़ारे।  रवि – शशि की छवि मनोहर,  लौटे वायु में  पुन: प्राण।  लाॅक डाउन ने […]

काव्य ग़ज़ल

सांवरे

कब दरश  दिखाओगे मुझको कब अपनाओगे तुम मोहन कब अपनी भक्ति का अमृत तुम मुझे पिलाओगे मोहन ये अंखियां दर्शन की प्यासी नित व्याकुल होती रहती हैं हे श्याम तुम्हारी यादों में बस हर पल रोती रहती हैं आ जाओ तो एक बार प्रभू दर्शन दे दो इस दुखिया को अपने चरणों से पावन तुम […]

काव्य ग़ज़ल

दोस्ती

मन से मन जब मिल जाते है, तब होती है दोस्ती। दूर रहें या पास रहें, एक ही दिखती इनकी हस्ती।। श्रेष्ठ दोस्त ही मानव के, दिखलाते हैं पंथ उचित। और दोस्त के दोष भाव ही, कर देते मानव को विचलित।। पाकर प्रभु श्री कृष्ण का साथ, अर्जुन बन गये श्रेष्ठ धनन्जय। और कौरवों के […]

काव्य ग़ज़ल

कल तक जो एक बेटी थी …

पिता की गोद से उतरकर, पति की बाहों में जाती है। पता नहीं एक लड़की से, कब औरत बन जाती हैं। कल तक जो आठ बजे उठती थी अब सुबह पांच बजे उठ जाती है। पहले सिर्फ अपने बारे मे सोचती थी अब सबकी फिकर करती है। पता नहीं एक लड़की से कब औरत बन […]

काव्य ग़ज़ल

गजल

फ़िज़ा दिल की  रंगत  उड़ा ले गई, गई   रात    मेरी    बला   ले  गयी। बहुत  आरज़ू  थी  कि   बरसे घटा, हवा  बादलों  को  उड़ा   ले  गयी। जहाँ  चाँद   तारों  की  चाहत बढ़ी, मुझे   मेरी   मिट्टी   बुला  ले  गयी। निगाहों  में  जाने  है कैसी कशिश, मेरे  दिल  को वो तो लुभा ले गयी। जहाँ  मौत   बनके  है   […]

काव्य ग़ज़ल

ग़ज़ल

तवानाई   बदन  की  रंज  में   खोया   नहीं   करते भरोसा  है  जिन्हें  तकदीर   पर  रोया   नहीं करते लगी है भूख फिर भी चैन  से सो जाते  हैं मुफलिस जिन्हें है फिक्र माल-ओ-ज़र की वो सोया नहीं करते निकलते हैं  जो अपने घर से लेकर चाह फूलों की किसी  की  राह  में  कांटे  कभी  बोया  नहीं करते […]