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ममता के साथ रथ यात्रा में शामिल हुईं नुसरत

कोलकाता, 04 जुलाई (वार्ता) व्यवसायी निखिल जैन के साथ शादी के बाद मांग में सिंदूर लगाकर तथा मंगलसूत्र पहनकर लोकसभा सदस्यता की पहली बार शपथ लेने पर मुस्लिम धर्म गुरुओं की कड़ी आलोचना का सामना कर रही टालीवुड अभिनेत्री से राजनेता बनी तृणमूल कांग्रेस सांसद नुसरत जहां गुरुवार को पार्टी प्रमुख एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव में शामिल हुईं। 

हर साल की भांति इस वर्ष भी सुश्री बनर्जी ने यहां इस्कॉन की ओर से आयोजित रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बाद में सुश्री बनर्जी हुगली जिले के महेश में भी आयोजित रथ यात्रा में शामिल हुईं।

इस्कॉन कोलकाता की रथ यात्रा यहां इस्कॉन मंदिर के सामने स्थित हंगरफोर्ड स्ट्रीट से शुरू हुई। इस्कॉन की ओर से 12 जुलाई तक विशेष प्रसाद का वितरण किया जाएगा। 

महेश मेें आयोजित रथ यात्रा विश्व की दूसरी सबसे प्राचीन यात्रा है जबकि बंगाल का सबसे पुराना उत्सव मानी जाती है। 

इस अवसर पर सभी को बधाई देते हुए सुश्री बनर्जी ने एकजुटता और धार्मिक एकता का आह्वान किया तथा सभी से शांति और सौहार्द बनाये रखने की अपील की।

इस्कॉन की ओर से विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित नुसरत इस समारोह के दौरान सभी के आकर्षण का केंद्र रहीं। नुसरत ने कहा,“ ममता बनर्जी ईद में भी आती हैं और सभी के साथ खड़ी रहती हैं। इसमें कोई राजनीति नहीं है, यह आस्था और विश्वास का प्रतीक है। आइए राजनीति और धर्म को अलग रखें।” 

नुसरत ने कहा,“ उन बातों पर ध्यान न दें जो निराधार हैं। मैं अपना धर्म जानती हूं। मैं जन्म से मुसलमान हूं और अब भी मुसलमान हूं। यह विश्वास के बारे में है। आपको इसे अपने दिल की गहराइयों से महसूस करना होगा, न कि अपने दिमाग से।”

इससे पहले, तृणमूल सांसद ने एक ट्वीट में कहा,“ मैं एक समावेशी भारत का प्रतिनिधित्व करती हूं, जो जाति, पंथ और धर्म की बाधाओं से परे है। मैं सभी धर्मों का सम्मान करती हूं, मैं अभी भी एक मुसलमान हूं और किसी को भी इस बात पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए कि मैं क्या पहनती हूं।”

नुसरत का स्वागत करते हुए, इस्कॉन प्रवक्ता राधारमण दास ने ट्विटर हैंडल से कहा,“ रथयात्रा निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए नुसरत को धन्यवाद। आप वास्तव में आगे की राह दिखा रही हैं। दूसरों के विश्वास और अन्य उत्सवों में शामिल होकर उनके प्रति सम्मान का इजहार करना सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने का एक निश्चित तरीका है।”

संजय.श्रवण 

वार्ता

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