साहित्य

लघुकथा

                                      मानिनी

कांता का, पति और दो बच्चों का छोटा सा संसार।पति कारखाने में काम करते थे। कुलमिलाकर निम्न मध्यवर्गीय परिवार, सीमित आय में भरण-पोषण करता हुआ। लॉकडाउन में पति घर बैठ गए,बचत न के बराबर, चिंता की लकीरें सोने न देती।कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं भोजन वितरण कर रही थी परंतु फोटो खींचने के डर से हिम्मत नहीं पड़ती, किसी के आगे हाथ फैलाना स्वाभिमानी इंसान को गवारा न था।हर आने वाला दिन चिंता को बढ़ा देता।ये लो कुछ रुपए है मेरे पास,आपसे छुपाकर सिलाई करती थी। उससे ही कुछ बचत की थी। नाराज़ तो नहीं हो ना ! पति अपनी गृहलक्ष्मी को अचंभित हो देखते रहे। स्वाभिमानी पति की इज्ज़त मानिनी पत्नि ने बचा ली थी।

तपस्या दत्तराज

इंदौर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *