मध्य प्रदेश

प्रवासी मजदूरों का सर्वे कराएगी मप्र सरकार

श्रम विभाग 24 या 25 मई से शुरू करेगा सर्वे
भोपाल । मप्र की शिवराज सरकार अपने ग्रह नगर लौटे प्रवासी मजदूरों का सर्वे कराएगी। सर्वे में पता लगाएगी ‎कि कौन सा मजदूर कहां पर था और वहां कौन सा काम कर रहा था। लाखों की संख्या में अपने घर लौटे इन मजदूरों को काम दिलवाने और उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ देने के लिए यह सर्वे करवाएगी। इसके बाद मजदूरों के नियोजन की रणनीति बनाई जाएगी। अन्य श्रमिकों का मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना ‘संबल’ में पंजीयन करवाकर लाभ पहुंचाया जाएगा। इसके लिए श्रम विभाग 24 या 25 मई से सर्वे शुरू करेगा। श्रम विभाग का अनुमान है कि प्रदेश में करीब 20 लाख प्रवासी मजदूर लॉकडाउन के बाद लौटे हैं। स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ माह का समय लगने की संभावना है। ऐसे में इन मजदूरों की रोजी-रोटी का इंतजाम करना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घर वापस आए कुशल श्रमिकों को उनकी क्षमता के मुताबिक काम उपलब्‍ध कराया जाए। प्रदेश के उद्योगों को भी श्रमिकों की जरूरत है। इसी मकसद से श्रम विभाग ने प्रवासी मजदूरों का सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इसमें प्रदेश के मूल निवासी मजदूरों को चिन्हित कर उनका पंजीयन किया जाएगा। डाटा बेस तैयार कर रणनीति बनाई जाएगी कि किसे कहां, कैसे रोजगार दिलाया जा सकता है। विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने बताया कि जो मजदूर लौटे हैं, उनसे यह पता लगाया जाएगा कि वे जहां से आए हैं, वहां क्या काम करते थे। यदि वे निर्माण क्षेत्र से जुड़े थे तो उनका पंजीयन मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में करवाया जाएगा। वहीं, ऐसे मजदूर जो अन्य क्षेत्रों में काम करते थे, उनका पंजीयन मुख्यमंत्री जन कल्याण योजना ‘संबल’ में कर योजना का लाभ दिलाया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न तरह की मशीनें चलाने वाले मजदूरों को औद्योगिक क्षेत्रों में नियोजित कराया जाएगा।मंडल में अभी आठ लाख 96 हजार असंगठित क्षेत्र के मजदूर पंजीकृत हैं। इनमें से आठ लाख 85 हजार मजदूरों को सरकार की ओर से लॉकडाउन अवधि में दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दो-दो हजार रुपये की सहायता उपलब्‍ध कराई गई है।
सुदामा नर-वरे/ 23 मई 2020

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