मध्य प्रदेश

परमिट नहीं मिलने पर 15 ट्रेनें घंटों खड़ी रहीं

भूख-प्यास से तडपते रहे बच्चे और बुढे लोग
भोपाल । प्रवासी मजदूरों के लिए स्पेशल बसें और ट्रेनें चलवाने के बावजूद उनकी समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। ट्रेनों के समय पर नहीं चलने से इनमें सवार बच्चों और बुजुगों को भूख और प्यास से तडपना पड रहा है। प्रवासी कामगारों को लेकर महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश और बिहार जा रही 15 विशेष ट्रेनें शुक्रवार को कई घंटों तक मध्यप्रदेश के खंडवा, बुरहानपुर व आसपास के स्टेशनों पर खड़ा रहना पडा। भुसावल रेल मंडल यानी खंडवा के बाद भोपाल रेल मंडल की सीमा में प्रवेश के लिए उन्हें परमिट देरी से मिला। इन ट्रेनों में सवार उप्र और बिहार के करीब 15 हजार से अधिक प्रवासी कामगार परेशान हुए। कुछ श्रमिकों ने स्टेशन पर बांटने के लिए रखी पानी की बोतलों की क्रेट भी लूट ली। भूख-प्यास से व्याकुल श्रमिकों में आक्रोश था। परमिट मिलने में देरी से खंडवा स्टेशन से होकर गुजरने वाली करीब छह ट्रेनों को रवाना होने में औसतन तीन घंटे का समय अतिरिक्त लगा। ये ट्रेनें खंडवा के साथ ही बड़गांव, बगमार, डोंगरगांव और कोहदड़ में सुबह करीब सात बजे से रुक गईं। इनमें सवार श्रमिक भोजन और पानी को लेकर परेशान हुए। प्रशासन की मदद से ग्रामीण स्टेशनों पर रुकी ट्रेनों तक टैंकरों से पानी पहुंचाया गया, जबकि खंडवा स्टेशन पर श्रमिकों को नगर निगम की ओर से खिचड़ी और पानी की बोतलें बांटी गईं। इधर, बुरहानपुर, नेपानगर, असीरगढ़, निंबोला, सागफाटा, मांडवा स्टेशन पर खड़ी श्रमिक ट्रेनों में भी यात्री परेशान हुए। करीब साढ़े चार घंटे तक स्टेशनों और जंगल क्षेत्र में खड़ी ट्रेनों में सवार श्रमिक खासे परेशान हुए और भोजन-पानी के लिए स्टेशन व पटरियों पर भटकते रहे। स्थानीय समाजसेवियों ने स्टेशन पहुंचकर मजदूरों को खाद्य सामग्री व पेयजल उपलब्ध कराया। भोपाल रेल मंडल के प्रवक्ता आईए सिद्दीकी का कहना है कि सभी रेल मंडलों में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का ज्यादा दबाव है, इसलिए विलंब हो रहा है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की संख्या भी बढ़ गई है। इन्हीं कारणों से दूसरे मंडल में भोपाल मंडल से ट्रेनें लेने में भी देरी हो रही है।खंडवा स्टेशन मास्टर जीएल मीणा ने बताया कि भोपाल रेल मंडल से परमिट नहीं मिलने से सूरत से बलिया, मुंबई से पटना, पनवेल से बलिया, बांद्रा से कटिहार जाने वाली ट्रेनें कई घंटे देरी से रवाना हुईं।
सुदामा नर-वरे/ 23 मई 2020

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