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चीन की कमर तोडऩे में ट्रंप से आगे मोदी

वॉशिंगटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के उत्पादन में एकाधिकार को तोडऩे की वैश्विक लड़ाई के नेता बनकर उभरे हैं। ये वो भूमिका है, जो अब अधिकतर मौकों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खाली छोड़ देते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ट्रंप ने अपना पहला राष्ट्रपति चुनाव मुख्य तौर पर चीन के खिलाफ सख्ती दिखाने के वादे के चलते जीता था, लेकिन हालिया दिनों में यह नीति बदलती दिखाई दी है। इसके उलट चीन के साथ पिछले सप्ताह गलवां घाटी में हिंसक झड़प से पहले ही भारत ने उसकी उत्पादन शक्ति के कुछ हिस्से को कब्जाने की योजना पर काम चालू कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को छोड़कर अपनी भरोसेमंद फैक्ट्रियां कहीं और ले जाने की सोच रही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को प्रतिस्पद्र्धी सौदे की पेशकश करने के लिए भारत ने पर्याप्त जमीन चिह्नित करने की योजना बनाई थी। इसके एक सप्ताह बाद ही एपल कंपनी ने अपने आईफोन के उत्पादन का अहम हिस्सा चीन से हटाकर भारत में स्थानांतरित करने की घोषणा कर दी। नतीजतन अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए अमूमन गुमनाम सा रहने वाला विषय भारत में चीन के साथ आर्थिक विभाजन का राष्ट्रीय अभियान बन गया। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि मोदी के ज्यादातर समर्थकों समेत भारतीय नागरिकों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पुतले फूंकना शुरू कर दिए। साथ ही ऐसे ऑनलाइन चैलेंज भी चालू हो गए, जिनमें भाग लेने वाले को चीनी उत्पाद कूड़े में फेंकते हुए अपनी फिल्म बनाकर अपलोड करने के चैलेंज दिए जा रहे हैं।

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