साहित्य

” हिंदी साहित्य में प्रेमचंद जी का कद काफी ऊंचा है”महान उपन्यासकार और कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती हर साल हम लोग 31 जुलाई को मनाते हैं ।

दोस्तों प्रेमचंद की कहानियां समाज की सच्चाई का सामना करती है और सत्य, न्याय और निष्ठा के महत्व को रेखांकित करती है। प्रेमचंद की कहानियों का मुख्य उद्देश राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों के बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा करना रहा था। 31 जुलाई 1880 को वाराणसी से सटा हुआ लमही गांव में इनका जन्म हुआ था। दोस्तों मुंशी ने प्रेमचंद नाम से 250 से भी अधिक लघु कथाएं ,निबंध और उपन्यास लिखे थे।दोस्तों गोदान इनका अंतिम और सबसे लोकप्रिय उपन्यास था जो इसको 1936 में लिखे थे । प्रेमचंद की रचनाएं समाज में वास्तविकता का प्रतिबिंब थी जो गरीबों और शहरी मध्य वर्ग की समस्याओं को बताती हैं।इनका  अधिकांश लेखन दोस्तों भ्रष्टाचार, बाल विवाह, विधवा, वेश्यावृत्ति ,सामंती व्यवस्था ,गरीबी, उपनिवेशवाद जैसे विषय के रहे हैं। इनका प्रसिद्ध लेखन है प्रेम श्रम, निर्मला ,कर्मभूमि , रंगभूमि ,गोदान।।दोस्तों हिंदी  साहित्य में प्रेमचंद जी का कद काफी ऊंचा है और उनका लेखन कार्य एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिंदी के विकास को अधूरा ही माना जाएगा।।ये संवेदनशील लेखक के साथ ही सचेत नागरिक, कुशल वक्ता और बहुत ही सुलझे हुए संपादक भी थे।। दोस्तों मुंशी जी गरीबी से लड़ते हुए अपनी पढ़ाई मैट्रिक तक पहुंचाएं। बचपन में इनको गांव से दूर वाराणसी पढ़ने के लिए नंगे पांव जाना पड़ता था। इनको पढ़ने का बहुत शौक था, आगे चलकर वकील बनना चाहते थे लेकिन गरीबी ने बहुत परेशान किया। दोस्तो बचपन में ही सर से पिता का साया छीन जाना बहुत से अभाव के बावजूद प्रेमचंद सदा मस्त रहने वाले और सरल जीवन के मालिक थे। जीवनभर विषमताओं और कटुताओ से खेलते रहे , इस खेल को तो उन्होंने बाजी मान लिया था , जिसको हमेशा जीतना चाहते थे। कहा तो यह भी जाता है इनके बारे में की यह हंसने वाले प्रकृति के मालिक थे । इनके ह्रदय में दोस्तों के लिए उधार भाव था , और साथ में गरीबों व पीड़ितों के लिए भरपूर सहानुभूति थी। आडंबर और दिखावे से मिलो दूर रहने वाले थे । महापुरुषों की तरह अपना काम स्वयं करना पसंद करते थे। इसलिए आप सब से भी मेरा अनुरोध है कि आडंबर और दिखावे वाला जीवन से आप भी दूर हो दोस्तों और सरल जीवन जीने का प्रयास करो ।।कवि विक्रम क्रांतिकारी ( विक्रम चौरसिया – चिंतक/पत्रकार/आईएएस अध्येता /मेंटर -9069821319दिल्ली विश्वविद्यालय-  अध्येता लेखक सामाजिक आंदोलनों से जुड़े रहे हैं व वंचित तबकों के लिए आवाज उठाते हैं – स्वरचित मौलिक व अप्रकाशित लेख ।। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *