साहित्य

लघु-कथा

                                                            पापा की चप्पल            मेरी उम्र कुछ  ३ से ४ साल की थी      मै अपने पापा की चप्पल पहन कर घर मे घूम रही थी छोटे छोटे पेरो मै बड़ी चप्पल पहन कर बहुत मज़ा आ रहा था  तभी पापा की आवाज़ आई –मेरी चप्पल कहाँ है ? शायद पापा सोकर जाग गए थे| और उनकी […]

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लघुकथा

बदलते रिश्ते कुछ दिनों से अनिता के पति की तबियत खराब चल रही थी। इधर ठंड इस बार कुछ ज्यादा ही पड़ रही थी तो इस ठंड के प्रकोप से कोई भी अछूता नही बचा था। अनिता के पति राजीव पर भी ठंड का असर कुछ ऐसा हुआ कि उनकी सर्दी ठीक होने को नही […]

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बड़ा मानूस

इतनी बड़ी गाड़ी में  सरपट चली जा रही थी उस से भी ज्यादा तेज उनका दिमाग दौड़ रहा था।अपनी कंपनी के लिए ओर्डर लाना,उसको सप्लाई करना और कौन से कौन खयाल आते जाते थे और जाते थे।       और कब दिमाग पुरानी बातों की ओर चला गया उसका पता ही न चला।छोटा सा गांव घर में […]

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लघुकथा

    वट-सावित्री व्रत सूनो जी ! कल वट सावित्री का व्रत है ,मैने बरगद के वृक्ष के पूजन की सारी तैयारी कर ली है ,पर एक काम बाकी रह गया है ,चलिऐ वह काम भी आपके साथ पेड़-पौधो की नर्सरी मे चलकर पूरा कर लेते है , पूजा ने अपने पति धवल से कहा ,धवल ने […]

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प्रणय का तीसरा कोण”

मौली आज पाँच साल बाद मुस्कुराई थी अपने पाँच साल पुराने प्यार को देखकर, माँ-पापा की इज्जत की ख़ातिर अक्षत से शादी तो कर ली, पर पति की जो छवि मौली के मन मैं थी उस फ्रेम में अक्षत का किरदार फिट नहीं बैठता था। मौली को अपना साथी चंचल, खुशमिजाज, हंसमुख खुलकर प्यार जताने […]

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संस्मरण

वेताल अभी ज़िन्दा है ….  सुबह लगभग तीन बजे होटल के कमरे के नीचे हॉर्न की आवाज़ ने बता दिया कि जॉय कार लेकर तैयार है / होटल के रिसेप्शन से कुछ सैंडविच पैक करवा कर हम लोग कार में बैठे / कार तेजी से ठंडी सड़कों पर दौड़ने लगी / पोर्ट ब्लेयर नाम का […]

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परी

परी एक बहुत प्यारी 7 वर्ष  की बच्ची जैसा नाम वैसा रूप बहुत सुंदर अपनी उम्र से ज्यादा समझदार शालीन,पहली बार मे जो मिले मन को भाने वाली प्यारी सी बेटी,अभी 15 दिन से हमारे ही घर के पास वाली वर्मा आंटी के घर अपने माता पिता के साथ किराए के दो कमरों में रहने […]

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फोटो

                                                                                  निर्मलाबेन देसाई ‘स्नेहा, इधर देखो ! शीतऋतु की गुलाबी ठंड और हल्की धूप में स्नान, नहीं बल्कि सूर्यस्नान ले रहा वह युवक, प्रकृति के अद्भुत व अप्रतिम सौन्दर्य को अपने ब्रश और रंगों के द्वारा केनवास पर किस तरह हूबहू चित्रित कर रहा है ?’ उस चित्रकार युवक की ओर नजर कर स्नेहा बोली, […]

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दरिंदे!

ताजा मिट्टी के पास बैठे गजराज को देखकर बलराम हाथी को आश्चर्य हुआ।   वह कई दिन बाद दूसरे जंगल से आया था। गजराज व बलराम अच्छे मित्र व मल्लयुद्ध के बलशाली खिलाड़ी थे।   ‘क्या हुआ…. विनायकी के क्या हाल है? पेट में घूम रहा ‘सेतु’ अब बाहर आने के बारे में क्या कह रहा है?’ […]

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लघु कथा

जाओ खुश रहो…. यह उसकी चौथी बिटिया थी.. नटखट.. कलाकार इतनी कि कूड़े करकट को भी कलाकृति में बदल दे.. जब उसकी तीन बड़ी बहिनों ने अपने पापा की उपेक्षा की थी तो उसके शब्द ही पापा को सांत्वना देते थे. हर वाक्य का आख़िरी हिस्सा होता था.. पापा ! सब ऐसे नहीं होते हैं, […]