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बैंकों से रुपया वापस लेना आसान है ?

धन किसी देश ही नहीं व्यक्ति की भी सबसे बड़ी सामर्थ्य है। अब यह सामर्थ्य घर बदल चुकी है। देश में आर्थिक लेन- देन हेतु कभी साहूकारी या महाजनी प्रथा प्रचलित थी। उन प्रथाओं पर लोगो का विश्वास था। अधिक ब्याज व अनियमितता के चलते यह कारोबार चाहे विलुप्त सा हो गया गया है पर […]

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व्यंग्य●

*हीरा व पन्ना !*                                                             किसी शायर ने लिखा हैं- सारा शहर दुश्मन हैं उसका,आदमी जरूर अच्छा होगा ! आदमी अच्छा हो ,वह भी हमारे अपने शहर का तो फ़िर बुरा तो लगना लाज़मी हैं !बात हमारे हीरा औऱ उस पन्ना की हैं | हीरा हमेशा खून-पसीने की खेती कर फ़सल तैयार करता और हर बार […]

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आजाद हिंद सरकार की 76 वीं वर्षगांठ

बदनावर (दिलीपसिह चौहान) जिस फौज का नाम सुनकर देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में ऊर्जा का संचार हो जाता था और उसी फौज का नाम सुनते ही ब्रिटिश सरकार के कान खड़े हो जाते थे । वह थी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के द्वारा बनाई गई आजाद हिंद फौज यूं तो आजाद हिंद फौज को […]

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एक बुजुर्ग से पूछा गया: जिंदगी में कामयाबी कैसे हासिल होती है?

उसने कहा ” इसके जवाब के लिए आपको आज रात का खाना मेरे पास खाना होगा। सब दोस्त रात को खाने के लिए जमा हो गए, उसने सू‌प का एक बड़ा बर्तन लाकर सबके सामने रख दिया, मगर सूप को पीने के लिए सबके सामने एक एक मीटर लम्बा चम्मच दे दिया और सबको कहा […]

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« चुनावी वादे , याद दिलाते गुजरी यादें »

  ” व्यंग्य “ चुनाव एक ऐसा खेल है, जिसे हम छुपम-छुपाई से भी परिभाषित कर सकते हैं | जो प्रत्येक पाँच वर्ष में जनता के साथ छल-कपट पूर्वक पूर्ण बेईमानी से खेला जाता है | जब-जब जनता पर मुसीबत का पहाड़ टूटता है, और जब आम आदमी नेता रूपी संजीवनी से संकट हरण के […]

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कैलेण्डर के रेड डेट !

*व्यंग्य*                                                                                         “मां को अपने बेटे और किसान को अपनी लहलहाती फसल देखकर जो आनन्द आता हैं ,वही आनन्द मुझ नौकरीपेशा आदमी को कैलेंडर में माहवार तारीखों के बीच लाल घेरे में तारीखों को देखकर आता हैं |” कैलेण्डर में कितने ‘रेड डेट’ 1,2,3,4…..10 इतने ही बस ! वैसे तो लाल रंग का यूनिवर्सल मतलब […]

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अभिव्यक्ति

●व्यंग्य●                                                                                                       रावण दहन समिति द्वारा विशालकाय रावण का पुतला बनाया जा रहा था |ढांचे पर पुआल,टाट और पटाखें भरे जा रहे थे |पुतले को वस्त्र पहनाए गए |पुतले के सिर फ़िट करते ही वह कुछ बोलने लगा जैसे-जैसे सिर सेट होते गए ,पुतला रावण दहन समिति से सवाल पर सवाल करने लगा |रावण दहन […]

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स्वच्छ भारत ,बोले तो क्लीन इंडिया* !

व्यंग्य                                                      स्वच्छ भारत ,बोले तो क्लीन इंडिया* !                                                                          दो दिन बाद बापू की डेढ़ सौ वी जयंती हैं,बोले तो फेस्टिवल ऑफ क्लीननेस ! बस इसी के वास्ते सफाई और सफ़ाई भर चल री हैं ! क्योंकि बापू को सफ़ाई बहुत पसंद थी |देश में हर तरफ़ सफ़ाई हो रही हैं |मुंह की सफ़ाई,कानों की […]

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(2 अक्टूबर गांधी जयंती पर विशेष)

(2 अक्टूबर गांधी जयंती पर विशेष)हिन्दू-मुस्लिम एकता के सबसे बड़े पक्षधर थे महात्मा गांधी सबसे अंतिम व्यक्ति का सबसे पहले कल्याण चाहते थे गांधी- सत्यनारायण सलवाडिय़ा (गांधीवादी) इंदौर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक ऐसी महान हस्ती का नाम है जिसे नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने राष्ट्रपिता कहा तो गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें महात्मा की उपाधि दी। महात्मा गांधी […]

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हनी की वैतरणी

-संदीप सृजन सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग। और लोग क्या कहेंगे इसकी चिंता किए बगैर कुछ काम कुछ लोग कर लेते है तो बाद में मुँह दिखाने के लायक भी नहीं रहते। क्योंकि जब लोग कहते है तो इज्जत फालुदा ही बनता है। अब हनी ट्रैप को ही देख लो, लिव इन में हनीमून […]