काव्य ग़ज़ल

जीवन मे माधुर्य लुटाये वो कविता होती है

********************************* शब्दों का  मधुर गुंजन कविता होती है। भावना की अभिव्यक्ति कविता होती है।। छन्द मात्रा लय ताल सुर कविता होती है। जीवन मे माधुर्य लुटाये वो कविता होती है।। प्रकृति का अतुलित आनन्द कविता होती है। संघर्षों में विजय दिला दे वो कविता होती है।। सत्पथ पर सबको चला दे वो कविता होती है। […]

काव्य ग़ज़ल

नन्ही बिटिया ——

गोद बिठा कर नन्ही को दुलार दूँ । दूध रोटी और पोष्टिक आहार दूँ । दूर भागे डर ममता की घनी छाँव दूँ । जीवन भर की खुशियाँ इस पर वार दूँ । काला टीका काजल का नकार दूँ । स्वास्थ्य टीके लगवा कर जीवन संवार दूँ । पाठ पढ़ा कर स्वच्छता का शाला भेज […]

काव्य ग़ज़ल

परिणाम की आई बारी है*********************

तेईस मई शुभ तिथि लो परिणाम की आईकिसकी होगी जीत किसकी होगी हार भाईधड़कनें तेज होती जा रही नतीजे क्या होंगेकिस नेता की मेहनत रंग लाएगी अब भाईनया चेहरा होगा देश का मुखिया या नहीं सत्ता परिवर्तन की चलेगी फिर आंधी भाईअभिनेता खिलाड़ी कई सितारे रोड शो किएनतीजे से पता लगेगा जनता किसे चाहे भाईलोकसभा में […]

काव्य ग़ज़ल

ग़ज़ल

जाति मज़हब देखकर पागल रहे।सद्गुणों के  जो नहीं  कायल रहे।जो  हमें  भूला  रहा  हर   दौर  में,हम  उसी  के  प्यार में पागल रहे।बूँद  बरसी   इक  न  मेरे  खेत  में,आसमां  पेे  गो  बहुत  बादल रहे।जो  बुज़ुर्गों  ने  दिये थे  कल मुझे,ज़िन्दगी  भर   वे  मेरे  मारल  रहे।क्यों बगावत  पर उतारू  हैं भला,ज़िन्दगी भर  जो  मेरे  लायल रहे।हमीद कानपुरीअब्दुल […]

काव्य ग़ज़ल

मेरे हमराही

न मैं जानता हूं,न मैं पहचानता हूं।फिर भी हर दिन,हर पल उसको ही सोचता हूं।आज नहीं तो कल कल नहीं तो आज पर वे मुझे मिलेगे।मेरे हमसफर की तरह मेरे हमराही की तरह।जब भी उस खुदा की मर्जी होगी।जब भी उस खुदा कीरजा होगी ।वे मुझे मिलेंगे एक दिन पर जरूर एक दिन। राजीव डोगरा कांगड़ा हिमाचल प्रदेश(भाषा अध्यापक)गवर्नमेंट हाई स्कूल,ठाकुरद्वारा।9876777233

काव्य ग़ज़ल

दर्द मिटाए मधुशाला

सुना  है   बहुत  मंद  उजाले   है   मधुशाला  में ,शायद जुगनू भटकते है वहाँ दिन ढले पैमानों में,शब्दो को यूँ  तो  हर कोई गुनगुनाता है अक्सर,मतलब समझ आता है उनको जो खुद को डूबा आया    मधुशाला    के    मय    के   प्यालो   में ,मधुशाला में कहीं किसी को आईने की जरूरत नही है,यहाँ  अगर  किसी  […]

काव्य ग़ज़ल

चुनें न सिक्का खोट

मतदाता जब जागता,प्रजातंत्र मुस्काय।सही वोट के मूल्य से,प्रगति दौड़ती आय।।2जनता की ये सोच हो, सभी करें मतदान।स्वच्छ विचारों से सदा, होता है कल्याण।।3सबसे पहले डाल दें,खुद चुनाव में वोट।औरों को भी राय दें,चुनें न सिक्का खोट।।4मत दें अरु प्रेरित करें,प्रजातंत्र के हेत।वोट पढ़ें जितने अधिक, वही सफल संकेत।।5गलत चयन चुनाव बने,प्रजातंत्र हित कोढ़।प्रजातंत्र मजबूत हो, […]

काव्य ग़ज़ल

काव्य रचना

मैं एक बावरी सी छोरीनिकल पड़ी अपने धुन में..जग क्या कहियां ये भान नहीं बस मस्त मगन अब चलती जाऊँस्वप्न उगाऊं नयनो मेंनदिया के सम बस बहती जाऊँसागर तक मेरा अंत नहींभाप बनूं उड़ जाउंगीउकेरुंगी घनघोर मेघ मैंमरुक्षेत्र में जल बरसाउंगीइतनी भी चाह नहीं की चदरी छोटी पड़ जायेचईला तापें ख्वाब़ हैं मेरेदेखो न कैसे मुसकाते हैंटूटे […]