साहित्य

भारत में विश्व फालुन दाफा दिवस समारोह

13 मई का दिन पूरे विश्व में फालुन दाफा अभ्यासियों के लिए एक विशेष महत्व रखता है. फालुन दाफा मन और शरीर का एक प्राचीन आध्यात्मिक अभ्यास है, जिसे श्री ली होंगज़ी ने पहली बार 1992 में सार्वजनिक किया. इस वर्ष फालुन दाफा के परिचय की 27 वीं वर्षगांठ है,  जिसे दुनिया भर में इसके अभ्यासियों ने मार्च, प्रदर्शन, सेमिनार, प्रेस कॉन्फ्रेंस, सांस्कृतिक प्रदर्शन इत्यादि का आयोजन करके मनाया और चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों के खिलाफ हो रहे दमन को लोगों के समक्ष उजागर किया.

भारत में फालुन दाफा अभ्यासियों ने विभिन्न शहरों में व्यायाम प्रदर्शन, अध्ययन सत्र और संगोष्ठियों का आयोजन किया. इस अवसर पर चीन में फालुन दाफा अभ्यासियों पर हो रहे दमन के बारे में भी भारतीय जनता और मीडिया में जागरूकता बढ़ाने का भी प्रयास किया गया.

नागपुर में श्रीमंत पूर्णचंद्र बूटी सभाग्रह में फालुन दाफा अभ्यास परिचय के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया गया. पुणे में, अभ्यासियों ने स्थानीय पार्क में व्यायाम प्रदर्शन द्वारा लोगों को फालुन दाफा के बारे में अवगत किया. प्रसिद्ध कुब्बन पार्क में बैंगलोर के अभ्यासियों ने लोगों के समक्ष अभ्यास और ध्यान का प्रदर्शन किया. हैदराबाद के त्यागराया गण सभा ऑडिटोरियम में एक सम्मलेन आयोजित किया गया जिसमें फालुन दाफा के अभ्यास के बारे में परिचय दिया गया और चीन में हो रहे दमन को उजागर करने के लिए विडियो दिखाया गया. कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और कई अन्य शहरों में, स्थानीय अभ्यासियों ने लोगों को अभ्यास सिखाया और सच्चाई, करुणा और सहनशीलता का संदेश फैलाया जो फालुन दाफा के मूल सिद्धांत हैं.

आपसे आग्रह है कि इस महतवपूर्ण विषय पर भारतीय जनता में जागरूकता लाने के लिए आप इस इवेंट को अपने मीडिया में कवर करें.

प्रष्ठभूमि: फालुन दाफा, जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है, को पहली बार चीन में मई 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा  सार्वजानिक किया गया. आज, 120 से अधिक देशों में 10 करोड़ से अधिक लोग फालुन दाफा का अभ्यास कर रहे हैं. फालुन दाफा और इसके संस्थापक, श्री ली होंगज़ी को, दुनियाभर में 1,500 पुरस्कारों और प्रशस्तिपत्रों से नवाज़ा गया है. श्री ली होंगज़ी को नोबेल शांति पुरस्कार व स्वतंत्र विचारों के लिए सखारोव पुरस्कार के लिए मनोनीत किया जा चुका है.
चीन में दमन: चीन जो फालुन गोंग का जन्मस्थल है, वहां इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण 20 जुलाई 1999 को कम्युनिस्ट शासन द्वारा फालुन गोंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया. पिछले 19 सालों से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी फालुन गोंग को दबाने के लिए क्रूर दमन कर रही है. लाखों फालुन गोंग अभ्यासियों को बंदी बना लिया गया, लेबर कैंप में भेजा गया, उनकी जमीन-जायदाद जब्त कर लीं क्योंकि वे सत्य – करुणा – सहनशीलता के नियमों पर विश्वास करते हैं. अभ्यासियों को शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी जाती हैं और अभ्यास को छोड़ने के लिए ब्रेनवाश  किया जाता है. इसके अतिरिक्त, स्वतंत्र जाँच द्वारा यह प्रकाश में आया है कि चीनी शासन, सरकारी अस्पतालों की मिलीभगत से, कैदियों के अवैध मानवीय अंग प्रत्यारोपण के अपराध में संग्लित है. चीन में कैद  फालुन गोंग अभ्यासी इस मानवता के विरुद्ध अपराध के मुख्य शिकार हैं.

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