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धोखे से बेटी ने करा लिया मकान खुद के नाम

80 वर्षीय बुजुर्ग को बच्चे भी नही दे रहा खाना
भोपाल। 80 वर्षीय बुजुर्ग प्यारेलाल रायकवार की बेटी और दामाद ने धोखा देकर मकान की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। कोर्ट में धोखाधड़ी का केस लगाने पहुंचे प्यारेलाल कहते हैं कि बेटी को सजा जरूरी मिलनी चाहिए। वे कहते हैं कि कभी नहीं सोचा था कि बेटी धोखा देकर हमें सड़क पर खड़ा कर देगी। उन्होंने बताया कि बेटों से विवाद के कारण एक बार बेटी हमें अपने घर रखने के लिए ले गई। तभी हमसे रजिस्ट्री की कॉपी मांगी और रिन्यू कराने के बहाने अपने नाम के रजिस्ट्री पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बाद उसने और दामाद ने हमें अपने घर से निकाल दिया। प्यारेलाल कहते हैं कि पत्नी को ब्रेन हेमरेज हो गया था। इलाज के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो मैंने बेटी से रजिस्ट्री के कागज मांगे कि मकान गिरवी रखकर इलाज कराऊंगा। तब पता चला कि बेटी ने धोखे से मुझसे हस्ताक्षर कराकर मकान अपने नाम करा लिया है।
उन्होंने कहा कि पत्नी का इलाज न कराने पाने के कारण वह तड़प-तड़प कर मर गई। इसके बाद बेटों ने तेरहवीं करने से मना कर दिया, क्योंकि मकान बेटी ने अपने नाम करा लिया था। जब बेटी से मिन्नतें की तो उसने तेरहवीं की और घर का सारा समान लेकर चली गई। प्यारेलाल के तीन बेटे भी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। अभी मकान पर बेटों का ही कब्जा है, लेकिन वे पिता को परेशान करते हैं व खाना तक नहीं देते। बुजुर्ग ने भरण-पोषण के लिए एसडीएम कार्यालय में शिकायत की थी, जहां से उन्हें तीनों बेटों द्वारा हर माह एक-एक हजार रुपए देना तय हुआ था। एडवोकेट सरिता राजानी का कहना है कि बुजर्ग व्यक्ति को पहले भी भरण-पोषण दिलाया है। एक बार फिर इन्हें न्याय दिलाने के लिए केस दायर करेंगे। माता-पिता को ऐसे बच्चों के प्रति सख्त कार्यवाही करनी चाहिए और उन्हें उचित दंड देना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी संतान अपने माता-पिता के साथ छल और दुर्व्यवहार नहीं करे।
सुदामा नर-वरे/25मई2019

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