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व्यंग्य

“एक अदने से लेखक का जन्म..?             *दिनेश गंगराड़े, इंजीनियरिंग और परीक्षा   का चटनी-रोटी का सा साथ होता है।कठिन परीक्षा से ही इंजीनियर व इंजीनियरिंग में कभी भी यकायक टेस्ट,दैनिक,साप्ताहिक,मासिक परीक्षा टपक सकती है।44साल पूर्व एक देहाती छात्र इस महानगर में अभियांत्रिकी भनने आता है।रात 1बजे कालोनी की शादी में शोले के एल पी रिकॉर्ड […]

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गुरु मण्डलेकरजी,कादम्बिनी और मैं!

            वो समय अलग था, जब गुरुओन चेलों से किसिम-किसिम के काम करवाते थे|पाठशाला में साफ-सफ़ाई से लेकर पौधों हेतु देसी ट्री गार्ड बोले तो ‘कणगें’ बनाने वास्ते बेशरम की सोटियां लाने तक बल्कि ‘वर्क एट होम’ भी | इधर शिष्य भी कभी आरुणि बन बिछ जाते तो कभी एकलव्य बन अंगूठे दे डालते| बट […]

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व्यंग्य

 चल पैसेवर, मजबूरी दुह जबसे देश धरती पर कलियुग में कोरोनायुग का पदार्पण हुआ है, इस युग के आने से पहले जो लोग अपनी गिरती सजती दुकानों में जनता को बीस बीस दिन बासी ताजी जलेबियां, ताजे सड़े बेसन के लड्डू, कीड़ियों वाले गुड़पारे खिलाया करते थे , आज उन्होंने अपनी दुकानों के बाहर से […]

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कोई लौटा दे मेरे, भंडारे वाले दिन

वे भी क्या दिन थे यानि लॉक डाऊन के पहले के, जब हमारे नगर में भंडारे आम थे । अपने देश के किसी सुदूर कोने में या महानगरों में रहने वालों को शायद भंडारा क्या होता है यह पता न हो, तो बता दें कि भंडारे को गली या मोहल्ला भोज कहा जा सकता है […]

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व्यंग्य-

  किसम किसम के लोग  – कमलेश व्यास ‘कमल’ इन दो महीनो में जितना ‘वाट्सएप’ चलाया है, उतना कभी नहीं चलाया था। इससे प्राप्त ज्ञान व अनुभव के आधार पर कुछ नए किस्म के लोगों से परिचय हुआ, इन लोगों में वे शामिल नहीं हैं जो बिना नागा,तीसों दिन अलसुबह “गुड माॅर्निंग” शुभ प्रभात के […]

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आँख शब्द से बनने वाले मुहावरों का व्यंग्य लेख

एक तिनका इक्यावन आँखें  डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ सरकारी पाठ्यपुस्तक लेखक, तेलंगाना सरकार चरवाणीः 7386578657, Email: jaijaihindi@gmail.com मैं घर की छत पर हवा खाने के लिए मुंडेर पर खड़ा था। मंद-मंद हवा का आनंद ले रहा था। अचानक जोर की हवा चली और एक तिनका आँखों में आ गिरा। चूँकि मैं कवि हरिऔध तो […]

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व्यंग्य

चला तो चाँद तक, नहीं तो शाम तक  फुटपाथ किनारे मारुति ओमिनी कार में एलईडी बल्बों का ठेला लगाए एक दुकानदार लगातार एक ही धुन बजाए जा रहा था- ‘घर को चमकाना है, खुद को रोशन करना है, तो आइए भाई साहब, कदरदान! मेहरबान! दुनिया का सबसे अच्छा एलईडी बल्ब। तीन एलईडी बल्ब सिर्फ सौ […]

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व्यंग्य

गरीब  आज राधेश्यामजी मेरे पास बहुत ही गम्भीर प्रश्न लेकर आए।पूछने लगे आपने कभी गरीब  को देखा है?मैं सोच में पड़ गया,अपने अतीत को याद करने लगा,जन्म से लेकर अभी तक की जो मेरी जीवन यात्रा है,वह अंग्रेजी का सफर(suffer) है।मै अपने आप को गरीब नहीं कह सकता,और मैं अमीर भी नहीं हूँ।मध्यमवर्गीय होने की […]

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व्यंग्य

जिंदा रहे तो चरणवंदन फिर कर लेंगे सर्वेश्वर सुशील कुमार ‘नवीन’ अटपटा लगा ना। वो तो लगेगा ही। भला सर्वेश्वर से भी कोई इस तरह बात करता है। वो तो कृपानिधान हैं। जगत के पालनहार है। कुपित हो गए तो संहार का अधिकार भी तो उन्हीं के पास हैं। तो फिर कुछ ऐसा बोलने से […]

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सारा कुछ गणित का खेल है

व्यंग्य प्रख्यात साहित्यकार, निर्भीक पत्रकार,व्यंग्यकार,स्वर्गीय प्रहलाद केशव अत्रेजी ने शिक्षा पद्धति पर व्यंग्य करते हुए लिखा है,गणित के अध्यापक को बाजार में, खरीददारी करने नहीं भेजना चाहिए,गणित के अध्यापक क्रय की जाने वाली वस्तुओं के दाम नहीं पूछते,उन्हें बाजार भाव से कोई लेना देना नही होता, वह सिर्फ बिल में लिखी टोटल चेक करते हैं।टोटल […]