काव्य ग़ज़ल

कोटि-कोटि बापू तुम्हें प्रणाम है…

गाँधी इस युग के नायक थे, सत्य अहिंसा के गायक थे। सबका मन वो हर लेते थे, सबको अपना कर लेते थे। संस्कृति के वो वाहक थे, गाँधी सच्चे जननायक थे। तुमने शान्ति का पाठ पढ़ाया, सबको पथ सही दिखलाया। तुमने हमें आज़ादी दिलाई, स्वावलम्बन की राह सिखाई। रामराज का सपना दिखलाया, जीवन का आदर्श […]

काव्य ग़ज़ल

“ अब तक की सबसे बड़ी खबर ”

करोना के जन्म के पहले भी हम न्यूज चैनलों से दूर ही रहते थे तथा करोना के जन्म के बाद में भी हम न्यूज चैनलों से दूर ही रहते हैं । वैसे न्यूज चैनलों से ही क्यों हम टी वी धारावाहिकों से भी दूर ही रहते हैं । लेकिन आज कुछ ऐसा हुआ की घर […]

काव्य ग़ज़ल

ग़ज़ल

आँखों  में  सवालात  के अम्बार  उठा कर।। वो फिर से खड़ा हो गया तलवार उठा कर।। रोटी को  तरसता  हुआ  दो साल का बच्चा। अब्बू  की  चला  आया है दस्तार उठा कर।। मुफ़लिस को नहीं लेता दवाख़ाना है महंगा। कांधे  पे वो ले  आया  है बीमार  उठा कर।। बस्ती में लगी आग जो  हाकिम  ने […]

काव्य ग़ज़ल

ग़ज़ल

हर रोज जिंदगी में ईक बड़ा हादसा होता है हाकिम के फैसलों से देख नया तजुर्बा होता है मालिक कहां गलत करता है गलती  तेरी मेरी है होता वही यहां  मुकद्दर मे जो भी लिखा होता है खैरात जो नहीं करता रोटी मांगना क्या उससे नेकी गुनाह फिर नेकी सबका जायका होता है हमको जरूरत […]

काव्य ग़ज़ल

एक समर अभी है शेष।

                         (1) शहीद हुए वीरों के , शौर्य मान अभी  है शेष, तरकश में शर कस चुका , वार अभी है शेष। धधकती,बिलखती रोष पर सत्ता है मदहोश- एक समर हो  चुका,एक समर अभी है शेष।                         (2) आहत हुआ विश्व है,आना अमन अभी है शेष, इंसान में  इंसानियत  की  परख अभी है शेष। व्याध  […]

काव्य ग़ज़ल

मुस्कुराते विश्व का सपना

तेरा नाम ले के भगवन, दिन रात मन ये गाए, सुख शांति विश्व में हो, हर कोई मुस्कुराए । अधर्म और हिंसा, हर मन से चली जाए, अशांति का ये कीड़ा, कहीं भी नज़र न आए । कोरोना जैसी महामारी, अविलंब चली जाए, विनाशकारी आंधी तूफान, नहीं विश्व को सताए । तन मन के रोग […]

काव्य ग़ज़ल

आओ मिलकर भारत का परचम दुनिया में लहराएं…

पोरबंदर में करमचंद के घर कुदरत ने दीप जलाया था, 2 अक्टूबर 1869  को घर में एक नन्हा मुन्ना आया था। बालक मोहन को माँ ने नैतिकता का पाठ पढ़ाया था, सबके संग प्रेमभाव से मिलजुल रहना सिखलाया था। इस हाड़-मांस के पुतले ने ये शक्ति वहीं से पाई थी, सत्य अहिंसा से दुश्मन की […]

काव्य ग़ज़ल

किसे बुलाऊँ

………….. दुनियाँ भर की प्यास लिए हूँ, अंत समय में किसे बुलाऊँ? हैं अनगिन इच्छाएँ बाकी, अंत समय में किसे बुलाऊँ? तिनका-तिनका मैंने जोड़ा, एक दिवस न खाली छोड़ा। अपने स्वारथ से दिल जोड़ा, स्वारथ रत ही  नाता तोड़ा, अब किसको आवाज़ लगाऊँ? अंत समय मे किसे बुलाऊँ? मंसूबे सब गोरे काले, जो भी थे […]

काव्य ग़ज़ल

कोमल की कुण्डलियाँ

चिकने चुपड़े चेहरे,वॉलीवुड की शान। पीछे इनके क्या छुपा, सोच-सोच हैरान। सोच-सोच हैरान, ड्रग्स की मादक बातें।  सुन्दर मुख सुकमार,किन्तु हैं भ्रामक घातें। कह ‘कोमल’ कविराय,सुकोमल भोले मुखड़े। अंदर है विष व्याप्त, दीखते चिकने चुपड़े। फिल्मी नायक नायिका, करें घिनौने काम। उतने नीचे काम हैं,जितने ऊँचे नाम। जितने ऊँचे नाम, काम सब काले-काले। डूब ड्रग्स […]

काव्य ग़ज़ल

घनाक्षरी

जीवन है पाठशाला, छल होती मधुशाला पथ से भटक रहे, लोग मोह जाल में ! मोहक है प्रेम डाल ,बौराई सी हुई चाल देख ना लड़खड़ाए, पैर हर हाल में ! कृष्ण की बाँसुरी सुन, स्वप्न में मगन मन बावरी सी दौड़ गई  , मदमस्त चाल में ! प्रेम शाँति अपनाओ, जीव को गले लगाओ […]