साहित्य

लघुकथा

माफी

“देखिए बहिन जी, हम मानते हैं कि उन बलात्कारियों ने आपकी बेटी के साथ बहुत ही गंदा काम किया। गैंगरेप के बाद उसकी नृशंस हत्या एक अक्षम्य अपराध है, परंतु मृत्युदंड ही इसका समाधान तो नहीं है न। आप भी एक माँ हैं। असमय अपनी संतान को खोने का दर्द आप भलीभांति समझती हैं। इन्हें मृत्युदंड दिए जाने पर इनकी माँओं पर क्या बीतेगी, जरा सोचिए। हमारा मानना है कि आपको इन्हें माफ कर देना चाहिए।”

“जरा आप इन बलात्कारियों की माँओं से भी पूछिए कि इनकी कारस्तानी से उन्हें कैसा महसूस हो रहा है ? हाँ, मैं एक माँ हूँ। इसीलिए मैं अपनी बेटी के बलात्कारी, हत्यारों को माफ नहीं कर सकती, क्योंकि आज यदि मैं इन्हें माफ करने की पैरवी करूँ, तो इनके जैसे लाखों बलात्कारी, हत्यारे और पैदा होंगे। मुझे उन अनगिनत माँओं की भी चिंता है जिनकी बच्चियाँ कभी भी मेरी बेटी की भाँति किसी अनहोनी की शिकार हो सकती हैं।”

– डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा

रायपुर, छत्तीसगढ़

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