साहित्य

लघुकथा

 

नेटवर्क प्रॉब्लम

“दो महीने से खाली बैठे हैं आप। धीरे-धीरे एकाउंट से सारे पैसे निकल चुके हैं। अब क्या कैसे होगा? मुझे तो रात-दिन यही चिंता खाए जा रही है।”-पत्नी दीप्ति के चेहरे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट नज़र आ रहीं थीं।

“हाँ! यही तो मैं भी सोच रहा हूँ। कम्पनी भी चुनिंदा लोगों को काम पर वापस बुला रही है। हालाँकि मैनेजर साहब बोले हैं कि महीने-डेढ़ महीने में सबको काम पर बुला लिया जाएगा।”-अरुण दीप्ति के कंधे पर हाथ रखकर बोला।”लेकिन तब तक?”

“तब तक के लिए कुछ व्यवस्था तो करनी ही होगी।”

“आपके दोस्त हैं ना दिवाकर भाई। कई बार आपसे पहले भी बोल चुके हैं कि कभी कोई जरूरत हो तो बताना। उनसे बात कीजिए। न हो तो कुछ पैसे उधार ले लीजिए। बाद में तनख्वाह आ जाने पर लौटा दीजिएगा।””सही कह रही हो। उम्मीद है दिवाकर तो इस आड़े वक्त में मना नहीं ही करेगा।”-कहते हुए अरुण ने मोबाइल उठाया और दिवाकर का नम्बर डायल किया।”हेलो! हाँ दिवाकर! मैं अरुण बोल रहा हूँ।”

“हाँ भाई! और कैसे हो? मैं भी आज तुम्हें ही याद कर रहा था। वो लॉकडाउन में फेसबुक पर तुम्हारी भाभी के साथ जलेबी बनाने वाली तस्वीर देखी थी। मज़ा आ गया देखकर। और बताओ! सब खैरियत तो है? कोई दिक्कत हो तो बताने में संकोच न करना।””हाँ भाई! इसीलिए तो तुम्हें फोन कर रहा था। वो क्या है ना, दो महीने से खाली बैठा हूँ। कम्पनी से मैनेजर का फोन आया था। बोला है आठ-दस दिन में काम पर वापस बुला लेंगे। तो…..बस…..कुछ…. पैसों की जरूरत थी। क्या कुछ इंतज़ाम…..?””हेलो! ……हेलो! ……हाँ अरुण! तुम्हारी आवाज़ साफ सुनाई नहीं दे रही। शायद नेटवर्क प्रॉब्लम है। मैं बाद में बात करता हूँ।”

“हेलो!….हाँ दिवाकर!…..हेलो!……”-अरुण ने दोबारा फोन मिलाया। उधर से कोई उत्तर न आया।

गौरव वाजपेयी “स्वप्निल”(कर अधिकारी)

जिला पंचायत परिसरनिकट-सन्तोषी माता मन्दिर

गोंडा रोडबलरामपुर (उत्तर प्रदेश)पिन कोड-271201

मोबाइल नम्बर-8439026183, 7983636782

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