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बैंकों को मिलेगा वेतन तय करने का अधिकार

अगले दौर की वार्ता आम बजट के बाद
मुंबई । सरकार जल्द ही बैंकों को वेतन तय करने का अधिकार देने जा रही है। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) और सरकारी बैंकों के बीच चल रही 11वीं द्विपक्षीय वेतन समझौता वार्ता में एक नए फॉर्मूले को शामिल किया गया है। इसके तहत बैंक अपने मुनाफे और वेतन बढ़ोतरी के बोझ को वहन करने की क्षमता के मुताबिक कर्मचारियों का वेतन बढ़ा सकेंगे। बैंक यूनियनों और बैंक प्रबंधनों के बीच 21 जून से बहाल हुई वार्ता में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। आईबीए के तत्वावधान में हो रही इस बातचीत को लोकसभा चुनावों के कारण तीन महीने के लिए रोक दिया गया था। अगले दौर की वार्ता आम बजट के बाद होगी।
54 साल पहले बनी व्यवस्था होगी खत्म
यह प्रस्ताव वेतन बढ़ोतरी के बोझ को वहन की बैंकों की क्षमता पर केंद्रित है और अब तक की परंपरा से हटकर है। करीब 54 साल पहले 19 जनवरी 1966 को पहली वार्ता में बैंकिंग उद्योग में सभी स्तरों पर सबको बराबर वेतन का प्रस्ताव रखा गया था जो एक अप्रैल, 1966 को लागू हुआ था। तबसे यही परंपरा चल रही है। वार्ता में शामिल रहे एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, वेतनमान में बढ़ोतरी का फैसला करते समय इसकी लागत वहन करने की क्षमता सबसे अहम घटक है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
यह होगा नया फार्मूला
प्रस्तावित फॉर्मूले के मुताबिक सभी बैंक कर्मचारियों के वेतन में एक निश्चित प्रतिशत तक न्यूनतम बढ़ोतरी होगी और उसके ऊपर बैंक अपने मुनाफे और भुगतान क्षमता के मुताबिक बढ़ोतरी करेंगे। हालांकि अभी इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन वेरिएबल वेतन के बारे में एक प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह परिसंपत्तियों और परिचालन मुनाफे पर बैंकों के रिटर्न पर आधारित है लेकिन यूनियन के कुछ नेताओं ने इसे तुरंत खारिज कर दिया।
एसएस/01जुलाई

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