काव्य ग़ज़ल

किसान को चेन से नींद आती है और हमें दो वक़्त की रोटी मिलती है। जब वर्षो होती है।।

किसान को चेन से नींद आती हैजब वर्षा होती है…

 और हमें दो वक़्त की रोटी मिलती है।

 जब वर्षा  होती है।।

गांव में हरियाली और

शहर में दीवाली आती है

 ‎जब वर्षा होती हैं।।

खेतों में फसलें खिलती है

और किसान के चेहरे पर

 मुस्कान आती हैं

जब वर्षा होती है।।

झुमती है प्रकृति और

गाते है बादल

जब वर्षा होती है।।

नदियाँ बहती है,

बहते है तालाब

जब वर्षा होती है।।

 ‎किसान को चेन से नींद आती हैं

 ‎और हमे पेटभर खाना मिलता है

 ‎जब वर्षा होती है।।

भोला झूमें

झूमें नंदी

संग भक्त झूमें

जब सावन में

वर्षा का आगमन होता है।।

भाई खुश होता है संग

बहन खुश होती है

जब रक्षाबंधन पर

वर्षा होती है।।

झूमें है प्रकृति

झूमें है खेत,खलियान

और झूमें ये संसार है

जब आता है

वर्षा का त्यौहार।।

प्रीतम गिरधारी राठौड़

निवासी बड़वानी (म.प्र)

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