मध्य प्रदेश

राजधानी में धडल्ले से बन रही पीओपी की मूर्ति

प्रशासन भूला एनजीटी के आदेश का पालन कराना
भोपाल । नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश को दरकिनार कर राजधानी के मूर्तिकार धडल्ले प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियां बनाने का काम कर रहे हैं। शायद जिला प्रशासन पीओपी की मूर्तियों के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाना इस साल भी भूल गया।यही वजह है कि इस साल फिर गणेशोत्सव के लिए शहर में पीओपी की करीब 5 हजार मूर्तियां बनकर तैयार हो गई हैं, इसी महीने मूर्तियों में रंगरोगन काम शुरू हो जाएगा। मूर्तिकार तेजी से पीओपी की मूर्ति बनाने के काम में लगे रहे, लेकिन अफसरों को इस पर निगरानी करने की फुर्सत नहीं मिली। जबकि पिछले साल तत्कालीन कलेक्टर सुदाम पी खाडे ने यह कहा था कि शहर में हजारों की संख्या में पीओपी की मूर्ति बनकर तैयार हो गई हैं और लेकिन अगले साल से पीओपी की मूर्ति नहीं बननें देंगे। बावजूद इसके शहर में पीओपी की मूर्ति बनाने काम तेजी से चल रहा है और अब फिर दावा किया जा रहा है कि एनजीटी के आदेश का पालन कराया जाएगा।
शहर में माता मंदिर, मैनिट चौराहा, पुराने शहर, कोलार रोड पर रोक के बाद भी मूर्तियां बना ली गई हैं। 5 हजार से ज्यादा मूर्तियों में रंगरोगन के लिए तैयार हैं। भोपाल में 100 से ज्यादा मूर्तिकार पीओपी की मूर्ति बनाने के काम करते हैं। यहां से मूर्ति बनाकर बाहर भी सप्लाई की जाती हैं। हर साल यहां पर 60 हजार से ज्यादा पीओपी की मूर्तियों को बेचने काम किया जाता है। मैनिट चौराहे के सड़क किनारे बने मूर्तिकार दिनेश प्रजापति के घर। मंगलवार दोपहर तीन बजे बड़ी संख्या में एक छोटे से कमरे पीओपी की मूर्ति बनाने काम तेजी से चल रहा है। पूछने पर दिनेश कहते हैं कि उनको दूसरा काम नहीं आता है, मजबूरी में मूर्ति बना रहे हैं। मूर्तियां बेचकर जो कमाई होती है उसी से साल भर परिवार का जैसे-तैस पालन पोषण कर पाता हूं। यह काम नहीं करुंगा तो परिवार के सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।
सुदामा नर-वरे/31जुलाई2019

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