इंदौर

पशुप्रेमी बेघर डॉग्स के लिए एक नई मिसाल बना रहे

इंदौर स्वच्छता के बाद इंदौर शहर के पशुप्रेमी मिलकर देश के लिए जी रहे बेघर डॉग्स  के लिए एक नई मिसाल बना रहे है।

  डोगीटाइज़शन नाम से चल रही इस मुहिम में शहर के जागरूक नागरिक सड़क के डॉग को सड़क पर ही गोद लेकर जन भागीदारी द्वारा शहर के हर डॉग का भोजन पानी और नसबंदी से डॉग्स की आबादी को दया भाव से निपट रहे है।

देश की आबादी १३५ करोड़ है और डॉग्स की आबादी ३.५ करोड़के क़रीबन है।इसका मतलब ४० लोग मिलकर एक १ को भोजन पानी प्यार और नसबंदी पर काम करे तो आने वाले १० साल में इन जीवों की आबादी पर अंकुश लगेगा।

यह कार्य जनभागीदारी के बिना सम्भव नहीं है। प्रयास हर नागरिक को करने  ही होंगे आप चाहे  डॉग  लवर हो या डॉग हेटर।

डोगीटाइज़शन की इस मुहिम को आगे ले जाने के लिए एक अनूठा प्रयास ओल्ड पलासिया इंदौर में रविवार ११/०८/१९ को  प्रातः १०.००  बजे हुआ जिसमे कॉलोनी के रहवासियो ने इन बेजुबान डॉग्स के साथ “रक्षासूत्र उत्सव” मनाया. इस उत्सव में बहनो ने इन बेज़ुबान डॉग्स की कलाई पर राखी बाँधी, उनके माथे पर टीका लगाया, उनकी आरती उतारी और उन्हें उनके पसंद का खाना  खिलाया।

पशुप्रेमियो ने बताया की दरअसल में देखा जाये तो असली रक्षा तो डॉग्स ही करते है, भले ही वो सीमा पर हो, एयरपोर्ट्स पर हो, रेलवे स्टेशन पर हो, कोई बम ब्लास्ट हो , या फिर घर की रक्षा करनी हो !  फिर क्यों इंसान इन्हे  अपने स्वार्थ के लिए जब मर्ज़ी आए तो इनका इस्तेमाल कर लेता है और जब मर्ज़ी आए तो इनके वजूद को नकार देता है, ना तो इनके खाने पीने का और न ही इनकी आबादी रोकने का प्रयास करता है।

“रक्षासूत्र उत्सव” एक सांकेतिक उत्सव रहा जिसके द्वारा पशुप्रेमियो ने समाज में इस वर्ग के प्रति शहर में जागरूकता फैलायीं।

शहर के पशुप्रेमी अपनी अपनी कॉलोनी की सड़को पर रह रहे डॉग्स को ना सिर्फ नाम दे रहे है बल्कि उनके २ समय खाने पीने का बंदोबस्त कर रहे है और ऐसे डॉग्स का विश्वास जीतकर इन्हें पकड़वाने में नगर निगम की मदद भी करते है। अभी तक मिलकर जनभागीदारी द्वारा कई डॉग्स की नसबंदी करा दी और रेबीज से बचने के लिए टीके लगवा दिए।

अब शहर  के कई डॉग्स भी खुश और रहवासी भी। मन में एक ख़ुशी भी है की हम लोग शहर और देश के लिए एक अच्छे नागरिक होने का कर्त्तव्य निभा रहे हैं।

ज्ञात रहे कि आपकी  कॉलोनी में जो डॉग्स रह रहे हैं वो नए डॉग्स आने नही देते। उनकी आबादी सिर्फ उनके द्वारा पैदा करे बच्चो से  बढ़ती है।

यदि इंदौर शहर की हर कॉलोनी अपनी रोड पर रह रहे डॉग्स की ज़िम्मेदारी ले लें तो कुछ सालों में जनभागीदारी से इंदौर डॉग्स की समस्या से भी निजात पा जाएगा और पूरे देश के लिए एक मिसाल बना देगा।

डोगीटाइज़शन को social media पर बहुत पसंद करा जा रहा है।

शहर  के कई पशुप्रेमी जो नियमित ३०-३० डॉग्स तक को खाना खिलाते है ने बताया की स्वच्छ भारत अभियान के चलते सड़क पर रह रहे डॉग्स विचलित है । वो घास या पत्थर खा कर जीवित नहीं रह सकते । ऐसे में यदि समाज मिलकर कोई रास्ता नहीं निकालेगा तो जानवर आक्रोशित हो कर काटेगा ही।

डोगीटाइज़शन मुहिम की सूत्रधार श्रीमती संतोष मुन्द्रा  ने बताया कि सड़क पर जी रहे के dog के साथ प्यार का बर्ताव ना सिर्फ़ नागरिकों को डॉगडॉग्ससे बचाएगा बल्कि एक ऐसे समाज की रचना करेगा जहाँ लोग एक दूसरे के साथ प्यार और नम्रता का व्यवहार करेंगे क्योंकि जब इंसान नियमित किसी प्राणी के साथ दया और करुणा का अभ्यास करता है तो उसका मन भी दयालु और कोमल हो जाता है।

यदि कोई इंसान बेज़ुबान के साथ क्रूर है तो समझ लीजिए की यह इंसान इंसानो के साथ भी क्रूर रहेगा। इसीलिए एक सुंदर समाज की रचना करने के लिए हमें लोगों के मन में इन जीवों के प्रति प्यार का व्यवहार सिखाना ही होगा।

इस उत्सव में बहनो ने छोटे छोटे पपीज़ को ९ इन १ का टीका लगाकर इन बेज़ुबानो को ९ भंयंकर बीमारियों से लड़ने और रोकथाम की gift दी।

कार्यक्रम में शहर के कुछ नागरिकों का सम्मान करा गया।

 श्री संतोष सिंह- इन्होंने भीषण  गर्मी में बेज़ुबानो के लिए १०० पानी के कुंड दान कर प्रेरित करा था।

 पपीते का ठेला लगाते आ रहे  कनैय्या लाल जो अपने पपीते की बिक्री हुए रुपए का १० प्रतिशत हिस्सा बेज़ुबानो के खाने में नियमित ख़र्च करते है।

 रीजेन्सी empire की श्रीमती संतोष मुन्द्रा जिन्होंने बिल्डिंग की सेक्रेटेरी होते हुए इन बेज़ुबानो के लिए बारिश और गर्मी में बिल्डिंग के आसपास इन्हें मौसम की मार से बचाने के लिए बैठने की जगह दी।

Leave a Reply