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महाराष्ट्र का असर झारखंड पर

महाराष्ट्र की राजनीति का असर झारखंड पर दिखने लगा है। कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र में इस समय जिस तरह के हालात हैं, वैसे ही झारखंड में बने तो वहां भाजपा और विपक्ष के नेता क्या कदम उठाएंगे, इसकी चर्चा अभी से होने लगी है। चुनाव से पहले ही नेताओं ने खंडित जनादेश आने की स्थिति में सरकार बनाने की संभावनाएं अभी से टटोलनी शुरू कर दी है। इस राह में भाजपा भी है, क्योंकि उसे सत्ता बचानी है।

बागी नेताओं के भरोसे भाजपा
महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट के समय बहुमत हासिल करने के लिए भाजपा ने कांग्रेस और एनसीपी के बागी नेताओं का सहारा लिया है। पार्टी ने ऑपरेशन कमल योजना की बागडोर चार नेताओं को सौंपी है। इनमें से दो नेता कांग्रेस से पार्टी में आए हैं और दो एनसीपी से। वर्तमान राजनीतिक ड्रामे में कांग्रेस-एनसीपी की काट के लिए भाजपा ने यह योजना बनाई है। ऑपरेशन कमल के तहत नारायण राणे, राधाकृष्ण विखे पाटिल, बबनराव पाचपुते और गणेश नाइक को जिम्मेदारी दी गई है। राणे-पाटिल कांग्रेस से भाजपा में आए हैं और पाचपुते-नाइक पहले एनसीपी में रहे हैं।

किसके पास कितने विधायक
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के विधायकों को लेकर शरद पवार और अजित जिस तरह के दावे कर रहे हैं, उसमें यह बता पाना आसान नहीं है कि किसका दावा सही है। कहा जा रहा है कि शरद पवार के पास उनकी पार्टी के 41 विधायकों के समर्थन के हस्ताक्षर हैं। चुनाव में एनसीपी से विजयी 54 में से बांकी बचे 13 विधायकों के बारे में अदालत को कोई जानकारी नहीं दी गई है। जबकि अजित कह रहे हैं कि सभी एनसीपी विधायक सरकार के साथ हैं, अब सच कौन बोल रहा है, इसका भी टेस्ट होना जरूरी है।

अजित पर पूरा दारोमदार
अजित पवार की कथित बगावत के बाद एनसीपी प्रमुख शरद पवार शनिवार को अजित की जगह नए विधायक को विधायक दल का नेता चुना। हालांकि अजित पवार ने राज्यपाल के समक्ष उस समय पार्टी विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा जब वह खुद विधायक दल के नेता थे। ऐसे में सवाल यह है कि भावी स्पीकर शपथ से पहले की स्थिति के आधार पर अजित पवार को विधायक दल का नेता मानेंगे या शनिवार को एनसीपी द्वारा इस पद के लिए नए नेता के चयन को। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है कि अगर अजित पवार को विधायक दल का नेता माना जाता है तो शक्ति परीक्षण के दौरान उन्हें ही व्हिप जारी करने का अधिकार होगा।
ईएमएस/ 25 नवम्बर 2019

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