काव्य ग़ज़ल

मेरा अपना घर

मेरा अपना घर है

आपका कहाँ?

पूछता हूँ

सवाल

सड़क पर बैठे फकीर से

पर क्यूँ?

पता नहीं

क्या हो रहा?

साथ मेरे

शायद अहम समा गया है

ठीक वैसे ही

जैसे कोई शरारती

अपनी चमक देखकर

कुछ क्षण चमक जाता है

और उजाला सा उजाला

फैला देता है

थोड़ा बहुत आसपास।

अशोक बाबू माहौर

ग्राम – कदमन  का पुरा, तहसील – अम्बाह, जिला – मुरैना(म. प्र.) 476111

मो.8802706980

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