इंदौर

हम लोग तो अजमेर की गलियों में मिलेंगे…..

:: हज़रत नाहरशाह वली के उर्स पर सुनने को मिली कौमी एकता की कव्वाली ::
:: अल-सुबह तक चला कव्वाली का सिलसिला ::
इन्दौर हिन्दू-मुस्लिम एकता के संदेश के साथ खजराना में हज़रत नाहरशाह वली का 71वें सालाना उर्स अक़ीदत के साथ मनाया जा रहा है। इन दिनों रात भर खजराना रोशन रह रहा है और रौनक देखने लायक है। मेला लगा है और शानदार कव्वाली हो रही है। बीती रात कव्वाली की महफ़िल में बिजनौर के कव्वाल रईस अनीस साबरी और बदांयू के फनकार जुनेद सुलतानी ने अक़ीदत के कलाम सुनाकर अल-सुबह तक सुनने सुनाने का सिलसिला जारी रखा। मशहूर कव्वालों ने सूफियाना कलाम से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।बतौर ख़ास मेहमान अजमेर दरगाह कमेटी के पूर्व चेयरमैन शेख अलीम और खजराना थाना प्रभारी प्रीतम ठाकुर ने शिरकत की। शेख अलीम ने कहा यह प्रदेश का बड़ा उर्स है जहां से एकता का संदेश जाता है।हज़रत नाहरशाह वली दरगाह कमेटी के अध्यक्ष हाजी अरब अली पटेल,अंसार पटेल,युनुस पटेल गुड्डू ने अतिथियों और कव्वालों का स्वागत किया।
मशहूर फनकार जुनेद सुल्तानी पहले भी इंदौर आये हैं। लेकिन कल उनका अंदाज़े बयां बहुत ख़ास था। उन्होंने गंगा-जमुनी तहजीब को बयां करती सूफी गीत मन कुंतो मौला फिजा अली मौला…सुनाया तो हर सुनने वाला भी उनके साथ गुनगुनाने लगा। उन्होंने कलाम पेश करने के दौरान गुफ्तगू करते हुए कहा मुल्क को खुशगवार बनाने के लिए सूफी बुज़ुर्गो ने कैसे सभी लोगों को जोड़ा। उन्होंने कहा इंदौर शहर ऐसा है जहां ऑडियंस खुद फनकार को पढ़वाती है। जुनेद सुल्तानी ने सभी को बांधे रखा।उन्होंने उम्मत की मदद अहमदे मुख़्तार करेंगे,हर दौर में रहेगी हुकूमत मोइन की सुनाकर खूब नज़राना हासिल किया।उन्होंने कहा मुझे दुख होता है कि आजादी के 72 साल बाद भी हम-हिन्दू मुस्लिम की बात करते हैं,जबकि हमें सिर्फ इंसानियत की बात करना चाहिये,क्योंकि यह ही सच्ची वतनपरस्ती है।उन्होंने भाईचारे का संदेश देते हुए कहा – हम यह न देखें हिन्दू मुसलमान कौन है, इसका पता लगाओ के इंसान कौन है, यूं मन्दिरों-मस्जिद के झगड़ों में न उलझो,
घर-घर जा के पता लगाओ परेशान कौन है।
उन्होंने यह शेर भी सुनाया – इन ज़ुल्मतों से हक़ के उजाले नहीं डरते, पत्थर ज़माना लाख उछाले नहीं डरते, वह और होंगे जिनको ज़माने का ख़ौफ़ है, ख्वाजा पिया के चाहने वाले किसी से नहीं डरते।
रईस अनीस साबरी के कलाम बन्दों को रब से जोड़ते हैं। जब उनको सुनते हैं तो सुनने वाले दुनियादारी से बेख़बर होकर खो जाते हैं।उनके कलाम दिल को सुकून भरा एहसास दिलाते हैं।उन्होंने सुनाया – अक्ल वालों मेरा मेयारे जुनूं तो देखो, उसपे मरता हूँ जिसे आंख से देखा भी नहीं। उन्होंने हज़रत अली की शान में कलाम पढ़े,जिसे सभी ने पसन्द किया।
उन्होंने रूहानियत में डुबोते हुए सुनाया – कांटे हैं मगर सूरत गुल बनके खिलेंगे, अनवार तरीक़त से भी मरकर न हटेंगे, क्यों ढूंढते हो शाही ठिकानों पे तुम हमें, हम लोग तो अजमेर की गलियों में मिलेंगे।
रईस अनीस साबरी ने दिलों को जोड़ने की ज़रुरत बताई – निस्बत के जगमगाते ये जुगनू भी कह उठे/कुछ लोगों के चलते हुए जादू भी कह उठे/क्या एकता है देखिये हिंदुस्तान में/मुस्लिम ही नहीं हिन्दू भी कह उठे ख्वाजा हैं दिल में।
इस मौके पर आसगर पटेल, रशीद पटेल,सलीम पटेल काका,,अफ़ज़ल पटेल,हनीफ पटेल गोल्ड,हनीफ पठान,जावेद पटेल, हाजी साबिर पटेल, अमीन पटेल, शहज़ाद सिद्दीकी, उपाध्यक्ष हाजी सरदार पटेल, सचिव शेख परवेज़,सहसचिव सलीम पटेल,कोषाध्यक्ष रईस खां पठान सहित हज़ारों की तादाद में श्रद्धालु मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन युनुस पटेल गुड्डू ने किया। आभार दरगाह कमेटी के सदर अरब अली पटेल ने माना।दरगाह मैदान पर आकर्षक झूलों का साथ मेले चल रहा है और लंगर खाने में हज़ारों ज़ायरीन लंगर ग्रहण कर रहे हैं। दरगाह पर मान-मुराद लेकर सभी धर्म के लोग पहुंच रहे हैं। उर्स का समापन रंग-ए-महफ़िल के साथ होगा।
उमेश/पीएम/9 फरवरी 2020

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