मध्य प्रदेश

सर्दी-खांसी के मरीजों को देख नहीं रहे छोटे क्लिनिक

भोपाल। कोरोना संक्रमण के चलते गली-मोहल्ले और कालोनियों में संचालित होने वाले क्लिनिक भी बंद हो गए हैं। जो चालू हैं वे किसी मरीज को देख नहीं रहे हैं, जबकि बदलते मौसम को लेकर लोगों में सर्दी और जुकाम की समस्या बढऩे लगी है।
जब भी मौसम बदलता है, तब मौसमी बीमारियां बड़ी तादाद में फैल जाती हैं। हालांकि इन बीमारियों में एंटीबॉयोटिक और कुछ दवाइयां देकर इलाज कर दिया जाता है, लेकिन इन दिनों सर्दी-खांसी के मरीजों को कोरोना से जोड़कर देखा जा रहा है। दो दिन पहले बारिश होने के कारण हलका बुखार और वायरल भी लोगों में होने लगा है। चूंकि शहर में कोरोना के मरीज बढऩे लगे हैं तो छोटे-मोटे डॉक्टरों ने दूसरे मरीजों का भी इलाज डर के कारण बंद कर दिया है। मरीजों को डॉक्टर न होने या फिर क्लिनिक बंद होने का बहाना बनाकर बड़े अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
बड़े अस्पतालों में भी मरीजों को सर्दी-जुकाम जैसी समस्या देखकर हमीदिया में जांच का भी कहा जा रहा है। ऐसे में लोगों में और भय बढ़ रहा है। डॉक्टरों को इस महामारी के प्रकोप के समय आम लोगों की समस्या दूर करने के लिए तैनात रहना चाहिए। डॉक्टर भी मरीजों को नहीं देख रहे हैं तो मरीजों में सर्दी-जुकाम की शिकायत को भी घर वाले कोरोना से जोड़कर देखने लगे हैं। कई तो इससे बचने के लिए घरेलू नुस्खों पर ही जोर देने लगे हैं, लेकिन इलाज डॉक्टरों से ही करवाने में भलाई है। जिस तरह से शहर में कोरोना पॉजिटिव की संख्या बढ़ती जा रही है, उसमें डॉक्टरों को भी अपनी जवाबदारी ध्यान रखना चाहिए।
‎विनोद/30 मार्च 2020

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