मध्य प्रदेश

नौकरशाहों की पदोन्नति को लगी कोरोना वायरस की नजर

पदोन्नति से मिलने हैं 18 आईएएस व आठ आईपीएस अफसर
भोपाल। प्रदेश में कमलनाथ सरकार के अंतिम दिनों में जिस तेजी से शुरू हुई राज्य प्रशासनिक सेवा (राप्रसे) से आईएएस और राज्य पुलिस सेवा (रापुसे) से आईपीएस संवर्ग में पदोन्नति की फाइल अब ठंडे बस्ते में चली गई है। इसकी वजह कोरोना को बताया जा रहा है। यही वजह है कि माना जा रहा है कि जून के पहले अब पदोन्नति के लिए संघ लोकसेवा आयोग के साथ विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक नहीं हो सकती है। यही वजह है कि फिलहाल सामान्य प्रशासन और गृह विभाग ने भी प्रस्ताव की तैयारी का काम बंद कर दिया है। फिलहाल यह दोनों ही विभाग इस समय पूरी तरह से कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए समन्वय पर फोकस किए हुए हैं। इस बार प्रदेश को पदोन्नति होने से 18 आईएएस और आठ आईपीएस अफसर मिलना है। राज्य सरकार ने पदोन्नति के लिए राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस संवर्ग में पदोन्नति की तैयारी साल के पहले ही माह में शुरू कर दी थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की अनुमति से पदों की मंजूरी का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था, जिसे मंजूरी भी मिल चुकी है। इसी आधार परर अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली, विजिलेंस क्लीयरेंस, विभागीय जांच सहित अन्य जानकारियां जुटाई जा रही थीं। वहीं, गृह विभाग ने भी आठ पदों का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था, जिसे भी स्वीकृति मिल चुकी है।
विभाग ने पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव तैयार कर बुलाया था, लेकिन पहले प्रदेश की सियासत में आई अनिश्चितता की वजह से प्रस्ताव तैयार नहीं हो सका और अब कोरोना की वजह से यह काम अटक गया है। सामान्य प्रशासन विभाग, जहां सभी विभागों और जिलों के साथ समन्वय का काम कर रहा है तो गृह विभाग लॉक डाउन को प्रभावी बनाने के मद्देनजर निगरानी कर रहा है। वर्क एट होम किए जाने के कारण प्रस्ताव तैयार करने वाले अधिकारी-कर्मचारी भी कार्यालय नहीं आ रहे हैं। सिर्फ उन्हीं अधिकारियों-कर्मचारियों को मंत्रालय बुलाया जा रहा है, जिनके बिना सामान्य कामकाज प्रभावित हो सकता है।
पांचवे साल भी गैर राप्रसे अफसरों को मौका नहीं
राज्य में गैर राज्य प्रशायनिक सेवा के अफसरों को लगातार पांचवें साल भी आईएएस संवर्ग में पदोन्नति का मौका नहीं मिलेगा। राज्य सरकार ने सभी 18 पद राप्रसे के अफसरों को देने का तय किया है। जबकि, तत्कालीन सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविंद सिंह इसके पक्ष में नहीं थे और उनके द्वारा मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र भी लिखे गए थे, लेकिन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं थे। अधिकारियों का मानना था कि नियमों में विशेष परिस्थिति में गैर राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों को आईएएस संवर्ग में लेने का प्रावधान है और फिलहाल ऐसी परिस्थिति नहीं है। हालांकि, पहले ऐसी कौन-सी परिस्थिति थी, इसका वे प्रभावित अधिकारियों को जवाब नहीं दे सके।
24 रापुसे अफसरों में से होगा आठ का चयन
राज्य पुलिस सेवा के 24 अफसरों में से आठ अधिकारियों का चयन आईपीएस संवर्ग में किया जाना है। विभाग ने पुलिस मुख्यालय से प्रस्ताव भी मांग लिया है। बताया जा रहा है कि एक पद के विरुद्घ तीन अधिकारियों के नाम प्रस्तावित किए जाएंगे। इसमें 1995-96 बैच के राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के नाम प्रस्तावित होंगे। बताया जा रहा है कि देवेंद्र सिरोलिया, यशपाल सिंह राजपूत, धर्मवीर सिंह, अरविंद कुमार तिवारी, प्रियंका मिश्रा, वीरेंद्र मिश्रा, प्रमोद कुमार सिन्हा, विजय भागवानी, राजीव मिश्रा, प्रकाश चंद्र परिहार, निश्चल झारिया, रसना ठाकुर, संतोष कोरी, जगदीश डाबर, मनोहर सिंह मंडलोई, रामजी श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह पवार, सुनील कुमार तिवारी, संजीव कुमार सिन्हा, संजीव कुमार कंचन, विनोद कुमार सिंह चौहान, मनीष खत्री और राजेश कुमार त्रिपाठी के नामों पर विचार किया जाएगा। अनिल कुमार मिश्रा के खिलाफ सीआईडी जांच चल रही है, इसलिए उनका नाम इस बार भी पदोन्नति की पात्रता रखने वाले अधिकारियों की सूची में नहीं आएगा।
विनोद/ 31 मार्च 2020

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