काव्य ग़ज़ल

शुभ वैशाखी आई

वैशाखी है पर्व खुशी का, जग में खुशियां बांटें।

शुभकामना संदेश नवल सूरज जग सम्मुख बांचे।

हर्षित अम्बर, पवन, वसुधा गर्वित पावक जलधि-जल,

नूतन पथ पर बढ़ा जीवन, उत्साह उदधि धर माथे।।

श्वान सदा टुकडे खाते पत्तल चाटा करते हैं।

काक, गिद्ध, सियार, शूकर मुर्दा बांटा करते हैं।

लोभी, कायर का जीवन धरती पर है भार सदा,

नर नाहर परहित जीते, समय न काटा करते हैं।।

गुरु गोविंद ने देश-धर्म हित कष्ट सहे सुख वारा।

राष्ट्र-यज्ञ की वेदी पर होम किया जीवन सारा।

अर्पित किए सपूत चार भारत मां की सेवा में,

वह राष्ट्रपुरुष धर्मध्वज रक्षक युद्ध कभी न हारा।।

नव अन्न भरे हैं सदन सभी घर-घर खुशियां छाईं।

नाच रहे पुरवासी गाते मंगल गीत बधाई।

स्नेह के सुमन सुवासित भारत में खिलते रहें सदा,

श्रम हुआ साकार कृषक खुश,  शुभ वैशाखी आई ।।

• प्रमोद दीक्षित ‘मलय’

शास्त्री नगर, अतर्रा -210201

 जिला – बांदा, उ.प्र.।

 मोबा : 94520-85234

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