काव्य ग़ज़ल

मैं पत्थरों के बीच..

मैं पत्थरों के बीच

दब रहा

आप खड़े

हँस रहे ,

बडे़ अजीब हो तुम

मुझे देखा तक नहीं

अपने आपको ही दिखा रहे

क्यों, क्या वजह है

जवाब दो

नहीं फिर

यहाँ से चले जाओ

मैं खुद ही जख्म भर लूँगा

हौले हौले

जो कुछ मिले !

अशोक बाबू माहौर

ग्राम कदमन का पुरा, तहसील अंबाह, जिला मुरैना (म. प्र.) 476111

मो 8802706980

ईमेल ashokbabu.mahour@gmail.com

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