साहित्य

विज्ञान पर आस्था भारी

वेंटिलेटर पर आज भक्ति का तीसरा दिन था। उसके पति कबीर पथराई सी आंखों से उसे देख रहे थे। निस्तेज पड़ी भक्ति का पिछले साल भर से हो रहे कष्टों का वेंटिलेटर शायद अंतिम पड़ाव था। पिछले साल हुए गर्भाशय के आपरेशन में डॉक्टर की छोटी सी लापरवाही ने भक्ति का जीवन नर्क बना दिया था। लापरवाही के फल स्वरुप हुई कई शल्यक्रियायों ने उसके तन  को ही नहीं मन हृदय तक को बींध दिया था। ईश्वर में अटूट आस्था रखने वाली भक्ति अब हारने लगी थी। लेकिन एक बात अवश्य सत्य थी कि उसके पति कबीर एक साए की तरह उसके साथ थे। कबीर ने किसी भी हालात में ईश्वर का  साथ नहीं छोड़ा था और भक्ति को यही समझाते थे कि ईश्वर सब अच्छा ही करेगा ।

कबीर याद करने लगे कि अभी कुछ दिन पहले ही तो भक्ति कह रही थी कि अब वह ठीक होने लगी है।किन्तु उसे क्या पता था अभी एक अन्तिम किन्तु सबसे कठिन पडाव बाकी है।आज भी भक्ति जब वेंटिलेटर पर है तब भी कबीर की नम आंखें और शांत होठ ईश्वर के साथ ही बात कर रहे थे। दो दिन और बीत गए थे किंतु भक्ति की हालत में कोई सुधार नहीं था। लेकिन उधर कबीर की श्रद्धा और आस्था में भी कोई कमी नहीं थी। उन्हें ईश्वर पर अटूट विश्वास था।इधर डॉक्टर भी चिंतित थे भक्ति को लेकर। आज भक्ति को छठा दिन था। वही सुबह थी पर सुर्य की लालिमा शायद कुछ अधिक ही थी।कबीर मंदिर से अपने ईश्वर से मिलकर अस्पताल आए थे कि खबर मिली कि भक्ति की  हालत में अब कुछ कुछ सुधार  है। कुछ आशा बंधी कि सब ठीक हो जाएगा। शाम होते-होते भक्ति की तबीयत सुधरने लगी थी। दूसरे दिन उसको सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था।  डॉक्टर भी हैरान थे कि अचानक भक्ति की तबीयत में सुधार कैसे हुआ। किन्तुु कबीर तो जानते थे कि यह सब उनके ईश्वर की दया का ही परिणाम है। यदि हम पूरे विश्वास के साथ अपनी डोरी ईश्वर के हाथ में सौंप देते हैं तो वह भी हमारे विश्वास को कभी डिगने नहीं देता कबीर का अटूट विश्वास इस बात का प्रमाण है। आज कबीर अपनी हँसती मुस्कराती भक्ति को लेकर घर लौट रहें हैं औरभी भी एक वस्तु साथ है उनके वह है ईश्वर के प्रति अनमोल श्रद्घा

  आज कोरोना के इस कोपकाल में हम सबको भी ईश्वर के प्रति ऐसी ही अनन्य श्रद्धा और निष्ठा की आवश्यकता है   

                          — अन्जना मनोज कुमार गर्ग

1-र-5 विज्ञान नगर

अशोक पार्क के पास

कोटा -324005, राजस्थान

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