काव्य ग़ज़ल

दोहे

         सच और झूठ

मित्रो! सच औ’ झूठ का,फर्क समझिये खूब।

झूठ कटीला बृक्ष है,सच है पावन दूब।

सच्चाई के मार्ग पर,जो चलते श्रीमान।

उनको मिलता है सदा,आदर औ’ सम्मान।

सत्य पुंज है तेज का,करता सदा प्रकाश।

झूठ तिमिर अज्ञान है,करता सदा विनाश।

सच्चाई के साथ में,संकट औ’ संघर्ष।

लेकिन मत घबराइये,अंत मिलेगा हर्ष।

झूठ कभी टिकता नहीं,उसके हल्के पाँव।

सत्य सदा होता सुखद,उसकी शीतल छाँव।

👉श्याम सुन्दर श्रीवास्तव ‘कोमल’

            व्याख्याता-हिन्दी

 अशोक उ०मा०विद्यालय,लहार

 जिला-भिण्ड(म०प्र०)

   मो०-9993282741

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