मध्य प्रदेश

जनवरी में करवाए जा सकते हैं नगर निगम के चुनाव

राजनीतिक दलों के साथ राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का बनाया कैलेंडर
भोपाल (ईएमएस)। उपचुनाव में भाजपा को अच्छी सफलता मिली और अब तीन साल सरकार चलाने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। लिहाजा अब नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। भोपाल नगर निगम के चुनाव भी फरवरी-मार्च में ही होना थे, जो नहीं हो पाए और प्रशासक काल चल रहा है। अब अनुमान है कि जनवरी अंत तक निगम के चुनाव करवाए जा सकते हैं। वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। अब सिर्फ महापौर पद का आरक्षण ही किया जाना है और नए सिरे से मतदाता सूची बनाने का काम भी शुरू किया जा रहा है। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरीय निकायों और पंचायत चुनाव के प्रचार-प्रसार हेतु प्लान और कैलेंडर भी तैयार कर लिया है।
पूर्व की कमलनाथ सरकार ने महापौर के सीधे चुनाव की प्रक्रिया में संशोधन किया था और पार्षदों के जरिए महापौर चुनने का नियम बना दिया, क्योंकि इंदौर सहित सभी बड़े शहरों में कांग्रेस के पास ऐसे जीतने वाले उम्मीदवार ही नहीं हैं, जो सीधे चुनाव में भाजपा को टक्कर दे सकें। लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार के काबिज होते ही शिवराज मंत्रिमंडल ने कुछ दिनों पहले फिर से महापौर के चुनाव जनता द्वारा ही करवाए जाने का अपना पुराना नियम ही लागू कर दिया। यानी भोपाल के महापौर का भी अब पहले की तरह ही जनता द्वारा चुनाव किया जाएगा। महापौर का आरक्षण बचा है, जो भोपाल में सम्पन्न होगा। वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया स्थानीय प्रशासन ने कुछ समय पूर्व ही पूरी कर ली थी। अब मतदाता सूची का काम अवश्य किया जाएगा।
शहर के 85 वार्ड में पार्षदों के लिए भी राजनीतिक जोड़तोड़ शुरू हो गई है। वहीं दोनों ही प्रमुख दल अब नगरीय निकाय, पंचायत और मंडी चुनाव में जुट गए हैं। भोपाल नगर निगम में चुनी हुई परिषद् का कार्यकाल भी फरवरी में ही समाप्त हो गया था, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 6 माह चुनाव आगे बढ़ाने का निर्णय लिया और इसी बीच कोरोना महामारी आ गई, जिसके चलते चुनाव और टल गए। वहीं फिर उपचुनावों की हलचल शुरू हो गई। 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी निपट गए और 19 सीटें जीतकर भाजपा उत्साहित हो गई और अब जोर-शोर से नगर निगमों पर फिर से कब्जे की तैयारी शुरू कर दी है।
भोपाल में ही पिछले 20 सालों से भाजपा के ही महापौर के साथ उन्हीं के ही अधिक पार्षदों की परिषद् शिवराज सरकार पर काबिज रही है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रचार-प्रसार के लिए कैलेंडर तैयार कर लिया है, जिसमें मतदाताओं को मताधिकार के लिए प्रोत्साहित करना, मतदान केन्द्रों की स्थापना, नए नियमों, नवाचारों में संशोधन और कोविड के दिशा-निर्देशों का पालन, ईवीएम मशीनों का प्रदर्शन, संचालन, कम वोटिंग वाले क्षेत्रों का आंकलन, सरकारी विभागों, मीडिया की जिम्मेदारियों का निर्धारण, नुक्कड़ नाटक, मतदाता जागरूकता कार्यक्रम से लेकर सभी तरह के आयोजन शुरू किए जा रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि दिसम्बर अंत तक मतदाता सूची से लेकर महापौर आरक्षण और अन्य प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और संभवत: जनवरी और अगर थोड़ा विलंब हुआ तो फरवरी में निगम चुनाव सम्पन्न करवाए जा सकते हैं।
विनोद/ 18 नवम्बर 2020