मध्य प्रदेश

विश्व बाल दिवस पर बाल अधिकारों के लिए दर्शायी प्रतिबद्धता

कलेक्टर अविनाश लवानिया, निगम आयुक्त के.वी.एस.चौधरी और स्मार्ट सिटी सी.ई.ओ आदित्य सिंह ने जताया गो ब्लू को समर्थन
भोपाल (ईएमएस)। विश्व बाल दिवस पर 20 नवम्बर को बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता के लिए यूनिसेफ ने गो ब्लू अभियान आयोजित किया। अभियान के तहत प्रदेश के स्मारकों और भवनों को नीली रोशनी से नीला किया गया था। कलेक्टर अविनाश लवानिया, नगर निगम आयुक्त के.वी.एस.चौधरी, भोपाल स्मार्ट सिटी सी.ई.ओ आदित्य सिंह इस अवसर पर यूनिसेफ के संचार अधिकारी अनिल गुलाटी के साथ सदर मंजिल पहुंचे और बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की। कलेक्टर श्री लवानिया ने कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए मध्यप्रदेश शासन सदैव तत्पर रहा है और आगे भी इस दिशा में हर संभव प्रयत्न होंगे।
20 नवम्बर 1989 को संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने “बाल अधिकार समझौते” को पारित किया था। इसके बाद से हर वर्ष 20 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाल अधिकार संधि ऐसा पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो सभी बच्चों के नागरिक, सांस्.तिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों को मान्यता देता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ बाल अधिकार संधि पर 1992 में हस्ताक्षर कर बाल अधिकार संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
विश्व बाल दिवस पर गो ब्लू अभियान के तहत भोपाल सहित प्रदेश की ऐतिहासिक स्मारकों, इमारतों को नीली रोशनी से रोशन किया गया। यूनिसेफ, मध्यप्रदेश के आग्रह पर जिला कलेक्टर ने जिला अस्पताल को नीला रंग दे कर इस अभियान को समर्थन दिया। भोपाल नगर निगम ने राजधानी में भोपाल गेट, राजा भोज सेतु और झील की सड़क (व्ही.आई.पी रोड) एवं स्मार्ट सिटी ने सदर मंजिल को नीली रोशनी से रोशन किया। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग ने 20 नवंबर को अपने सभी 65 संस्थानों को नीले रंग में रंग कर अपना समर्थन व्यक्त किया।
यूनिसेफ मध्यप्रदेश के कम्युनिकेशन के विशेषज्ञ अनिल गुलाटी ने कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक इमारतों और गांवों में घरों को नीले रंग में रंगना समग्र गो ब्लू अभियान का एक हिस्सा है। इस तरह हम बाल अधिकारों और जलवायु परिवर्तन जैसे प्रमुख मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बाल अधिकारों की पैरवी करने में अधिक सफल हो सकते हैं। गौरतलब है कि गो ब्लू बाल अभियान यूनिसेफ का एक वैश्विक आयोजन है जिसके तहत बाल अधिकारों के प्रति ध्यान आकर्षित करने के लिए स्मारक और भवनों को नीली रोशनी से नीले रंग में रंग दिया जाता है।