मध्य प्रदेश

गणगौर घाट पर महापर्व छठ के लिए उमड़े श्रद्धालु

खण्डवा (ईएमएस)। महापर्व छठ 18 नवंबर को नहाय खाय के बाद गुरूवार खरना संपन्न होने के पश्चात 20 को संध्या अर्घ्य और 21 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ समापन होगा। इन 4 दिनों तक सभी लोगों को कड़े नियमों का पालन करना होता है। इन दिनों में छठ पूजा से जुड़े कई प्रकार के व्यंजन, भोग और प्रसाद बनाया जाता है। शुक्रवार को शहर के गणगौर घाट पर छठ पूजा का आयोजन निगम प्रशासन द्वारा किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजन किया।
महापर्व छठ में सूर्य की पूजा दो बार की जाती है। एक डूबते सूर्य की और उसके बाद उगते सूर्य की। यह पर्व उस कहावत को भी झुठलाता है कि उगते सूर्य की सभी पूजा करते हैं और डूबते सूर्य की कोई पूजा नहीं करता। अर्थात मनुष्य में भी जिसके भाग्य बुलंदी पर होते हैं उसका सम्मान सभी करते हैं लेकिन, जिसके भाग्य गर्दिश में होते हैं उसकी ओर कोई आँख उठाकर भी नहीं देखता। बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख त्योहार छठ पूजा है। इस बार छठ पूजा 20 नवंबर को आई है, 21 नवंबर को पर्व का समापन होगा। क्योंकि यह त्योहार 4 दिनों का होता है। छठ पूजा में सूर्य देवता की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि छठ माता सूर्य देवता की बहन हैं। सूर्य देव की उपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और मन की सभी मुरादें पूरी करती हैं। छठ की शुरुआत नहाय खाय से होती है और 4 दिन तक चलने वाले इस त्योहार का समापन उषा अर्घ्य के साथ होती है। छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी से शुरू हो जाती है। इस व्रत को छठ पूजा, सूर्य षष्ठी पूजा और डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। महापर्व छठ समिति के अध्यक्ष एसजे श्रीवास्तव एवं संतोष शर्मा ने बताया कि नहाय खाय के अगले दिन खरना हुआ। इस दिन से सभी लोग उपवास करना शुरू करते है। इस दिन छठी माई के प्रसाद के लिए चावल, दूध के पकवान, ठेकुआ (घी, आटे से बना प्रसाद) बनाया जाता है। साथ ही फल, सब्जियों से पूजा की जाती है। इस दिन गुड़ की खीर भी बनाई जाती है। हिंदू धर्म में यह पहला ऐसा त्योहार है जिसमें डूबते सूर्य की पूजा की जाती है। चौथे दिन सुबह के अर्घ्य के साथ छठ का समापन हो जाता है। सप्तमी को सुबह सूर्योदय के समय भी सूर्यास्त वाली उपासना की प्रक्रिया को दोहराया जाता है। विधिवत पूजा कर प्रसाद बांटा जाता है और इस तरह छठ पूजा संपन्न होती है।