मध्य प्रदेश

मप्र और राजस्थान के बीच खो गया बाघों का कुनबा


दिसंबर से लापता हैं रणथम्भौर के छह बाघ, न तो कूनो आए और न ही वापस रणथम्भौर पहुंचे
भोपाल (ईएमएस)। राजस्थान के रणथम्भौर टाइगर रिजर्व (सवाईमाधोपुर जिले) से बाघों के कुनबे का कोई सुराग नहीं लगा है। इसमें तीन नर, एक मादा और दो शावक हैं। यह कुनबा 2 महीने बीतने के बाद भी कूनो नहीं पहुंचा हैं और न ही वापस रणथम्भौर गया है। अफसरों को उम्मीद थी, कि विचरण करते हुए यह बाघ मप्र के श्योपुर के कूनो-पालपुर नेशनल पार्क जाएंगे। ऐसे में अफसरों के दिल की धड़कन तेज हो गई है। बड़ा सवाल है कि यह बाघ आखिर कहां लापता हो गए? कूनो डीएफओ का कहना है कि उनको जंगल में न तो कहीं बाघों के पदचिन्ह नजर आए हैं और न ही किसी ने इन बाघों को देखा है। ऐसे में इन बाघों की ट्रैकिंग भी नहीं हो पा रही है।
यहां बता दें कि रणथम्भौर अभयारण्य डिप्टी डायरेक्टर टीसी शर्मा ने कूनो पार्क के डीएफओ पीके वर्मा को दिसंबर के अंतिम सप्ताह में पत्र लिखकर बताया था कि उनके यहां से 3 टाइगर, 1 मादा टाइगर और 2 शावक डेढ़ महीने से ट्रैकिंग में नहीं आ रहे हैं। संभवत: इन टाइगरों ने कूनो पार्क का रुख कर लिया है। इनकी ट्रैकिंग शुरू कराएं, ताकि उनकी लोकेशन मिल सके।
पत्र मिलने के करीब 18 दिन बाद बाघों का अभी तक कूनो में मूवमेंट या पदचिन्ह नहीं देखे गए हैं। बाघों का सुराग नहीं लगने के के चलते रणथम्भौर के अधिकारी और वल्र्ड वाइड फंड फॉर नेचर (विश्व प्रकृति निधि) के अधिकारी लगातार कूनो प्रबंधन के संपर्क में हैं। 15 दिन में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के कर्मचारी 3 बार कूनो में आ चुके हैं। टीम को अभी तक नेशनल पार्क में टाइगर के पगमार्क और किल (छोटे जानवर का शिकार) होना नहीं मिला है। ऐसे में अधिकारियों की चिंता और भी बढ़ गई हैं।
बाघों की कूनो में आने की आस
कूनो पार्क में टाइगर पहली बार नहीं आए हैं, इससे पहले बाघ टी-38 भी यहां कई सालों तक रह चुका है। राजस्थान के रणथम्भौर अभयारण्य और कूनो पालपुर नेशनल के पार्क बीच चंबल नदी बहती है। रणथम्भौर अभयारण्य से बाघ चंबल को पार करके कूनो आ जाते हैं। कूनों में बाघों के लिए पर्याप्त पानी और शिकार के लिए नीलगाय, चीतल, सांभर, हिरण आदि जानवर भी हैं। इसलिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों की निगाह कूनो पार्क पर टिकी है।
विनोद / दशरथ / 14 जनवरी 2021