मध्य प्रदेश

पुण्य करो या न करो पर पाप से बचो – मुनि श्री अजीतसागर महाराज


सांवरिया पार्श्वनाथ शिखर पर भलो विराजो रे
जय पारस जय पारस जय पारस देवा भक्तिमय भजन के साथ भगवान पार्श्वनाथ की आराधना
भोपाल(ईएमएस)। मोक्षमार्ग की शुरूआत अणुव्रत या महाव्रत से होती है। व्रतों का प्रारंभ पाप को त्यागने के बाद होता है पुण्य करो या न करो पर पाप से बचो ये उद्गार जवाहर चौक मंदिर में मुनिश्री अजीतसागर महाराज ने श्री पारसनाथ महाआराधना के वक्त व्यक्त करते हुए कहा जैसे पुण्य कर्म ग्रीन सिग्नल है आगे बढ़ना है या नहीं तुम्हारी इच्छा पर है पर पाप कर्म रेड सिग्नल है पाप कर्म रेड सिग्नल पर आपको थमना ही थमना है। मुनिश्री ने कहा मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति में पवित्रता और भावों की निर्मलता का त्योहार है। हम इस त्योहार को फैशन या मौज मस्ती का न बनाये। भारतीय संस्कृति में त्योहार चेहरे पर खुशी और मन में आनंद लाते हैं। वर्तमान में हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। त्योहार हमें हमारी संस्कृति और संस्कारों का भान कराते हैं। ऐलक श्री विवेकानंद सागर महाराज ने कहा वर्तमान में भौतिकता की चकाचौंध के आगे सभी दिग्भ्रमित हो रहे हैं। सतयुग के बाद कलयुग की जगह सेल्फीयुग के वासी हो गये हैं लोगों की जिंदगी वाट्सऐप स्टोरी में बट चुकी है और लोगों की भावनाऐं स्टेटस बन चुकी हैं। यह बहुत चिंता का विषय है। आधुनिकी युग में सोशल मीडिया के कारण अब लोगों के भावों की अभिव्यक्ति स्वयं में ही सिमट कर रह गई है। आज के युग में सेल्फी और कुछ चंद तस्वीरों के प्रचलन ने प्राणी मात्र और आपसी सद्भाव और जीव दया के धर्म से वंचित कर दिया है।
दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिश्री अजीतसागर महाराज ऐलक विवेकानंद सागर महाराज ऐलक दयासागर महाराज के सानिध्य में श्री पार्श्वनाथ महाआराधना महोत्सव के दौरान मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक और अष्ठ द्रव्यों से श्री कल्याण मंदिर विधान के 44 काव्यों के अर्घ्य भक्तिभाव से समर्पित किये गये। श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री प्रमोद हिमांशु एवं ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया। अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु द्वारा शहर के जिनालयों एवं अन्य निर्माण कार्यों के बारे में विस्तार से बताया सभी ब्रम्हचारी भाईयों एवं बहिनों द्वारा मुनिसंघ के कर कमलों में शास्त्र भेंट किये।
हरि प्रसाद पाल / 14 जनवरी, 2021