मध्य प्रदेश

नर्सिंग अंतिम वर्ष व जीएनएम के छात्रों को तत्काल ‎मिलेगी नौकरी


पैरामेडिकल स्टॉफ की कमी को देखते हुए सरकार ने ‎लिया यह फैसला
भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश में पैरामेडिकल स्टॉफ की कमी को देखते हुए शासन ने निजी कॉलेजों में अध्ययनरत बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष और जीएनएम के विद्यार्थियों को तत्काल सेवा में लेने का निर्णय लिया है। इन्हें 20 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा। पाटन विधायक अजय विश्नोई के सुझाव पर प्रदेश सरकार ने बीएससी नर्सिंग तृतीय वर्ष और जीएनएम के विद्यार्थियों को इस महामारी से लड़ने के लिए साथ जोड़ने का फैसला किया है। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संचालक छवि भारद्वाज ने आदेश सभी जिला कलेक्टरों को जारी किया है। विधायक विश्नोई ने बताया कि ज्यादातर कोविड केयर सेंटर में मानव संसाधन की कमी बनी हुई है। डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए भी सुझाव मुख्यमंत्री को दिया गया है इसमें प्रदेश स्तर पर एमबीबीएस की फाइनल परीक्षा पास इंटरर्नशिप करने वाले चिकित्सकों को मौका दिया जाए। इसके अलावा आयुष अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को भी सेवा में रखा जाए। इसके अलावा पीजी फाइनल के विद्यार्थियों को भी इस महामारी से जारी लड़ाई में साथ रखा जाए। इससे काफी हद तक चिकित्सकों की कमी दूर होगी। पाटन विधायक अजय विश्नोई ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कोरोना संक्रमण में चिकित्सकों की कमी पर सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि देश में एक लाख अस्सी हजार एमबीबीएस चिकित्सक नीट की सीट पाने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा आनलाइन शीघ्र करवा कर नतीजे घोषित हो जाए। जो वंचित हो उन्हें एक साल कोविड सेंटर में ड्यूटी करवाई जाए। जिन्हें आगामी परीक्षा में ड्यूटी करने पर आतंरिक मूल्यांकन के अलग से अंक मिले। इससे संकटकाल में चिकित्सकों की काफी कमी दूर हो पाएगी।उन्होंने कहा कि कई सुझाव पर शासन ने अमल शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए एक हफ्ते तक घर-घर जांच अभियान चलाया जाए। जहां भी संक्रमित मिले उन्हें वहीं दवाई दी जाए। इससे भी काफी हद तक मरीजों का अस्पतालों तक आना कम होगा।
सुदामा नर-वरे/01 मई2021