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सामयिक आलेख: स्वाद अपरंपार

हास्य और गाम्भीर्यता की अनूठी रार, गजब… ‘पोली’ और ‘पोली का यार’ सुशील कुमार ‘नवीन ‘ किसी रिपोर्टर ने हरियाणा के रामल से पूछा कि आप लोग बार-बार कहते सुनाई देते हो कि भई, स्वाद आग्या। ये स्वाद क्या बला है और ये आता कहां से है। रामल ने कहा-चल मेरे साथ।आगे-आगे रामल और पीछे-पीछे […]

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व्यंग्य

   खाए कोई, स्वाद बताए कोई    डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा उरतृप्त सरकारी पाठ्यपुस्तक लेखक, तेलंगाना सरकार चरवाणीः 73 8657 8657, Email: jaijaihindi@gmail.com मेरा एक रईस मित्र है। बहुत बड़ा व्यापारी है। उसे व्यापार में करोड़ों का मुनाफा हुआ है। एक दिन मेरी उससे भेंट हो गई। तभी उसे एक फोन आया। फोन पर बात […]

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व्यंग्य

 गई श्रद्धांजलि पानी में महामारी से बचने हेतु सोशल मीडिया द्वारा सुझाए सुझावों का अक्षरशः पालन करता डिफेक्टिव लेखक होने के चलते दिमाग की तमाम टूटी खिड़कियां, दरवाजे तक बंद किए कुछ नया सोचने को डरा डरा बैठा ही था कि इधर उधर से कहीं से भी नाक या गले में कोरोना न घुस जाए […]

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मजदूर की नींद का सर्वे मुकेश राठौर     सोलह मजदूरों के साथ दर्दनाक हादसा हुआ तो देश में बहस चल पड़ी, जैसा कि हर बार होता है|लेकिन,यह रेल दुर्घटना नही थी बल्कि रेल से हुई दुर्घटना थी|कदाचित पहला मौका जब रेल से दुर्घटना हुई और रेल्वे जिम्मेदार ही नही!गोया खरबूजा चाकू पर आ गिरा हो|…जो […]

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इस सदी की अद्भुत रेल यात्रा

शाम ठीक चार बजे राजेन्द्रनाथ ने रेल में बैठ कर  हाथ पर सेनिटाइजर मला और अपनी पत्नी वैजंती की तस्वीर को   वालेट से निकाल कर हाथ में ले लिया और तस्वीर से कहा देख रही हो आज ये कैसे दिन आ गए है । हर कोई ट्रेन में दूर दूर बैठा हैं सब के चेहरे […]

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शराब और कोरोना

                                ————————-                                        कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जरुरी सावधानियां रखने के साथ देश में लॉकडाउन के कारण शराब की दुकानें भी बंद थीं। इन बंद दुकानों के अंदर महंगी शराब की बोतलों के साथ सस्ती शराब की बोतलें भी रखी थीं। हालात को समझते हुए सभी बोतलें अपने दिल और दिमाग […]

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व्यंग्य – “डर लगता है” –

इन दिनों वो बात – बात पर कहते हैं ‘डर लगता है।’ या तो उन्हें डर के फोबिया ने जकड़ लिया है या फिर वे डर नाम के तकिया कलाम का शिकार हो गए हैं। कोई कुछ भी कहता है तो उनके मुख पर पहला वाक्य यही  आ धमकता है “डर लगता है” मटोले काका […]

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चम्बल के बिहड़ .

जब म. प्र. के मुख्यमंत्री मा. स्व: प्रकाशचन्द्रजी सेठी थे तब चम्बल के दुर्दांत डाकू माधोसिंह व मोहरसिंह का आत्म समर्पण करवाया जा रहा था, उस समय मा. सेठीजी ने चम्बल के बिहड़ के उन्मूलन की चर्चा करते हुवें कहा था कि मेरी इच्छा है कि चम्बल के  बिहड़ को समतल कर दिया जाये तो […]

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व्यंग्य

लाइव होने के रूहानी सुकून   जो कवि लाइव होने से बचे हो, वो जल्दी से लाइव हो जाएं क्योंकि कोरोना खत्म हो जाने के बाद इसकी कोई गारंटी नहीं कि अभी, जो आप को तमाम लाइक कमेंट मिल रहीं हैं बाद में भी वही मिल पाएं। यह लपककर हाथ में लेने वाला मौका अगर […]

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व्यंग्य

      “सुराग्रह” बापू जब पानी के एक जहाज पे किसी विषुवतीय देश से भारत लौटे ,तो एक बड़ी हीं तल्ख और मारक चीज साथ लाए थे।चीज क्या थी,तोप बोलो तोप।स्थूल इतनी कि गोरों के साम्राज्य तो भस्मीभूत हो हीं गए, और सूक्ष्म इतनी की हर खद्दरधारी अपने कुर्ते की जेब में धर घूमने लगा। पुलिस, […]