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गड्ढा

              गत वर्ष टी वी पर बहुत सुन्दर से अच्छे क्लोजप में  दिखाया जा रहा था कि एक बच्चा एक पानी रहित कुआँ यानि बड़ा सा गड्ढा  में  गिर गया था।कुआँ  किसी निर्माण कार्य के लिए बनाया गया था। कार्य पूर्ण होने के बाद भी उसे भरा नहीं जा सका था। टी वी में  दिखाया गया […]

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ठियो पर आजीविका चलाने वाले को अब कहां मिलेगा ठौर ?

(प्रीतम लखवाल) आज के दौर में ठौर-ठिकाना ढूंढना उतना ही जोखिम का काम है, जितना चाय के कप में गिरे बिस्किट को 2 मिनट बाद निकालना। अगर किसी को ठौर मिल जाए तो उसे ठिकाने की जरूरत होती है और ठिकाना मिल जाए तो ठिए की जरूरत आ खड़ी होती है। इस दुनिया में ठौर, […]

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‘खुश नहीं है, सुकून से बैठा आदमी हैं!’

आदमी बन्दर नहीं है जो अपनी मर्जी से कहीं भी बैठ जाए? आदमी मर्जी से नहीं, मजबूरी में बैठता है। मजबूरी कभी परिवार है तो कभी खुद। हर कोई चैन से बैठकर बंशी बजाना चाहता है। एक घर हो, घर में बैठक और बैठक में चार दोस्त हों, जो साथ में बैठकर हुक्का गुड़गुड़ायें, ताश […]

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मन की बात:सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यों है

दहशत का माहौल तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा  रही अजीब सा माहौल है , अजीब सा हाल है इन दिनों अपने देश का ,बहुत दुखद पहलू हैं अर्थ व्यवस्था के , दर्दनाक खबरें हैं बेरोजगारी की , तंगहाली की । इसमें कोई शक नहीं कि ऐसा बहुत कुछ हो रहा है जो […]

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“स्त्री तन”

कविताओं में नक्काशी सा तराशा गया स्त्री का तन हकीकत की धरातल पर वहशीपन की पहली पसंद बन जाता है।  कहाँ उमा दुर्गा का दर्शन करती है मर्द की आँखें औरत में, उन्मादित होते आँखों की पुतली पल्लू को चीरकर आरपार बिंध जाती है। लज्जित सी समेटते खुद को बांध लेती है दायरे में, तकती […]

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सियासी भूतों का जलवा

–रामविलास जांगिड़ (मो 94136 01939) दादाजी हमेशा भूतों में ही बिजी रहा करते। उनको भूत बहुत दिखाई देते। वे मसान में जाकर अक्सर भूत सिद्धि करते। हर दूसरे दिन भूतों का किस्सा लेकर बैठ जाते और मजे ले-लेकर भूतों से लड़ने का जिक्र करते। एक घटना के अनुसार उनको एक बार दांतभूत मिल गया था। […]

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‘अन्नदाता ‘ की ताक़त का आंकलन करने में विफल है सरकार

तनवीर जाफ़री                                                                  देश का ‘अन्नदाता ‘ गत नौ महीने से भी अधिक समय से आंदोलनरत है। आंदोलन का समाधान निकलने के बजाय धीरे धीरे इस किसान आंदोलन की तीव्रता और तल्ख़ी दोनों ही बढ़ती जा रही है। सरकार व सरकारी पक्षकारों,नेताओं व प्रशासन द्वारा अपनाया जाने वाला ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैय्या किसान आंदोलनकारी नेताओं व सरकार […]

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जिंदगी टुकड़ों में

एक बार मेरा एक दोस्त मिला,वह जज था उदास सा दिख रहा था। काफी देर इधर उधर की बातें की लेकिन उसके मुंह से अपनी परेशानी की बात न निकली, बोलना चाह कर भी बोल नहीं पा रहा था शायद ऐसा मैंने महसूस किया।हम लोगों में काफी नजदीकियां थी एक दूसरे के दिल की बात […]

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डंके की चोट पर

आज के संदर्भ में भागवत गीता की प्रासंगिकता पिछले दिनों एक सज्जन मेरे पास आये और मुझे कुछ धार्मिक पुस्तकों की डिजिटल प्रारूप मुझे दिखाया।पुस्तक कुछ ऐसे डिजाइन किए गए थे कि एक रिमोट नुमा यंत्र को पुस्तक में लिखी किसी शब्द से स्पर्श कराएं तो वह उस श्लोक को बोलने लग जाता था।देखने में […]

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“उदास लड़के देखे है कभी”

उदास लड़कों के भीतर अंतर्द्वंद्व का दावानल भड़भड़ता रहता है, झाँका है कभी उदास बैठे लड़कों की रूह के अंदर? भीड़ में भी अकेलेपन का शिकार होते विचारों की आवाजाही में तैरते उदास लड़के बहुत अकेले होते है, भावहीन चेहरे पर नज़रें ठहराकर देखो भीतर से हिले हुए होते है… ना.. प्रेम में धोखा मिलने […]