साहित्य

लघुकथा :

                               // घर //             “बाबूजी ! मेरी पेन की नींंब टूट गयी थी। ठीक से नहीं चलती थी। मैंने पेन ही फेंंक दी। मुझे नई पेन चाहिए।”             “हाँ बेटा, ठीक है न…। कल ले आऊँगा नई वाली पेन।” दूसरे ही दिन नई पेन लेकर मुकेश खुशी-खुशी स्कूल गया था।             “माँ…! मेरे लिए […]

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कहानी

रात बीत चुकी थी    रात के दो पहर बीत चुके थे।प्रति पहर नगर घड़ी के बजते घण्टे से कजरी जाग जाती और उसे यह भी ज्ञात हो जाता कि रात का कौन सा पहर चल रहा है। उसने अपने अदिन के चालीस बरस इसी फ्लाईओवर ब्रिज के नीचे टाटपट्टी और बोरे से बनी झोपड़ी […]

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डायरी

“हेलो, रविश जी, आ जाइये, प्रभा जी स्वर्ग सिधार गयी”  सबेरे ही मेन्टल हॉस्पिटल से फ़ोन था घबराकर कार निकाली और चल पड़ा, 2 घंटे का रास्ता था, और वो राह उसे अतीत की तरफ ले गयी । बचपन से माँ को या तो किचन समेटते देखा, या, मशीन में कपड़े सिलते या अपने कमरे […]

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‘जारा बेगम’

विद्या निकेतन विद्यालय (मुंबई) के औडिटोरियम में आज दिनांक १९ जून २०१८ को  बहुत बड़ा एवार्ड फंक्शन है | बारहवीं की परीक्षा के परिणाम में जो बच्चे अव्वल आए थे उन्हें आज डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर द्वारा इनाम दिया जाना तय हुआ है | यह प्रोग्राम लाइव टेलीकास्ट होना था | सबसे हैरानी की बात यह थी […]

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घर की इज़्ज़त

“बाबू जी! कोई काम हो तो बताओ। पैसे चाहे जो दे देना। सुबह से शाम तक ड्यूटी बजाऊँगा। आप तो बड़े अफसर हो, कहीं भी काम पर लगा दोगे।” गिड़गिड़ाते हुए उसने कहा था।खन्ना साहब ने ऊपर से नीचे तक उस आदमी को देखते हुए कहा-“अरे बाबा! अब तुम्हारी उम्र काम करने की नहीं है। […]

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लघुकथा

पुजारी कोरोना संकट काल की इस उधेड़बुन में  नदी से  स्नान कर  वह पंडित मंदिर की ओर बढ़े चले जा रहा था। छोटे से  शहर  के वह मंदिर का पुजारी, मंदिर की चढ़ोत्तरी पर ही आश्रित था। वह कोरोना के समाचारों को देख देख कर परेशान था। उसकी आजीविका लगभग बन्द हो गई थी। ‘कोई […]

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कविता की सबसे सरल विधा है हाइकु

हाइकु क्या है । हाइकु कैसे लिखें । हाइकु कविता की सबसे सरल विधा है जो जापान से निकली और आज पूरे विश्व में प्रचलित है अनेक भाषा में लिखी एवं पढ़ी जाती है । हाइकु में बहरए मात्राए वजनए लघु. गुरूए यतिए यम छंदए अलंकार किसी प्रकार की बंदिश नहीं है । मात्र तीन […]

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मार्गदर्शक–द गाइड

लगता है ये लॉक डाउन तो लंबा चलेगा , स्थिति अभी  नियंत्रण में नहीं है , मोबाइल में ई  समाचार पत्र पढ़ते हुए चाय पीते पीते शेफाली ने चिंताजनक लहजे में कहा और मोबाइल सेंटर टेबल पर रखकर  चार्जर लेने घर के अंदर चली गयी।सुबह के 8 बजने को थे,शेफाली घर के लॉन में अपने […]

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लघुकथा

 रिश्ते पार्क में सब बुजुर्ग अपने अपने पोतों-पोतियों को लेकर आये थे। बच्चे, कोई फिसलपट्टी पर फिसल रहा था तो कोई झूला झूल रहा था। शाम का रोज का यही क्रम था जब बच्चों की स्कूल से छुट्टी हो जाती तो मन बहलाने के लिए दोनों ही यानि बच्चे और बड़े सब यहाँ आ जाते […]

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लघु कथा

पश्चाताप के आंसू सुनंदा ने अपनी कच्ची उम्र से लेकर बुढ़ापे तक की यात्रा अपने पति के साथ की। दोनों बहुत खुश थे। एक दूसरे का बहुत ख्याल रखते थे। उनके पास पुश्तैनी जागीर थी इसलिए किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत कभी नहीं पड़ी। दोनों बेटे परदेस में कमाने लगे। यहां दोनों आराम […]