काव्य ग़ज़ल

मुक्तक

तुम  कर्मचारी उनकी  सरकार में हो क्या / तुम स्वतंत्र नहीं उनके अधिकार में हो क्या / उनकी शान में बहुत झूठे कसीदे पढ़ रहे हो / तुम अभी घर पर नहीं दरबार में हो क्या / मुझे देश की खस्ता हालत दिखायी दे रही है / मुझे अबलाओं  की  चीखें  सुनायी दे रही है […]

काव्य ग़ज़ल

उपवन की ओ कली

वो बेटी थी मेरी परी थी स्नेह से भरी हुई थी मातृ ऋण से मुक्त होने की मुझे जल्दी पड़ी थी। नवीन सृष्टि की कल्पना में मेरे संग वो उड़ चली थी। कर दिया था ब्याह उसका वो बड़ी चंचल कली थी, श्रृंगार की मूर्ति बनी वो अनुरंजित पग धर बढ़ चलीं थी वैभव से […]

काव्य ग़ज़ल

सौहार्द

******* सौहार्द से ही निभते हैं नाते रिस्ते सौहार्द से ही चलती है दुनिया सौहार्द से ही वनती सीडि़यां अपनों के हृदय में पहुंचने के लिऐ प्रेम तक पहुंचने के लिऐ होती है जरुरत सौहार्द की सौहार्द से ही मिलते सूत्र देश की अखंडता का वैमनस्य मिटाकर हृदय से नव कल गढे़ ,चलो आओ सब […]

काव्य ग़ज़ल

स्वदर्शन

———————————————- कभी- कभी ख़ुद से, बात किया करो, थोड़ा  ख़ुद के लिए कभी जिया करो! बहुत  समय, निकाल  दिया दूसरों में,  कभी  ख़ुद को भी वक्त दे दिया करो! उड़ रही  पतंग जैसी, ज़िंदगी तुम्हारी, उसकी डोर को तुम पकड़ लिया करो, कोई हमराही भी मिल जाये दिलकश, बाहों में  तुम उन्हें, जकड़ लिया करो! […]

काव्य ग़ज़ल

अफसाना

सच्चा है प्यार मेरा जानोगे कैसे? झूठा नहीं है मानोगे कैसे? जो फुर्सत मिले तो कभी आजमाना, झूठा नहीं है यह अफसाना। उत्तर प्रदेश वादों की कीमत  कब तक निभाओगे?  खुशियों की बारिश कब  तक लूटाओगे? जो आदत सी हो गई तो  मुझे ना भुलाना। झूठा नहीं है यह अफसाना। सफर में शिकायतें होती रहेंगी, […]

काव्य ग़ज़ल

सदगुरू की महिमा

गुरू की संगति से मिला  नव जीवन का आधार । धूल धूसरित जीवन को मिल गया नया आकार । निरा मूर्ख कलुषित मन को मिला जीने का अधिकार । फिर सदगुरू के उपदेशों को मन ने किया स्वीकार । मात पिता सखा बंधु का अनुपम मुझको प्यार मिला । मन की बातों को कहने का […]

काव्य ग़ज़ल

जिंदगी एक उलझन सी लगती है….

किसी को समझना…. है कितना मुश्किल, और उसे समझाना… बहुत मुश्किल,  आंसुओं को छिपाना…. होता है मुश्किल, दर्द छुपा मुस्कुराना…. और मुश्किल l समझा लेते हैं खुद को अक्सर,  खुद में खुद को ढूंढने की कोशिश है करते,  रिश्तों के भाग-गुना से निकल,  फिर जाने क्यूँ…. जोड़ लेते है सबको,  हर ज़ख्म भर जाते हैं,  […]

काव्य ग़ज़ल

मैं तो एक गम का आँसू हूँ

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, मैं तो एक गम का आँसू हूँ, दरिया बन बहता चला गया कभी झरना बन कभी नदिया बन सागर में बहता चला गया वह बह निकला खारा होकर सन्ताप मेरे अन्तर्मन था मेरे कष्टों का ले प्रवाह जो बंधा मेरे बन्धन  में था शायद गम का बादल छँटता तू रूप बदलता चला गया मैं […]

काव्य ग़ज़ल

हे जगदीश्वर

हे जग के पालनहारे जगदीश्वर, अखिल जगत के संचालक। कल्याण करें प्रभु जीव जगत का, आप ही सबके के प्रतिपालक। सकल जगत है माया के छल में, नहीं पता वास्तविकता असल में। छल-प्रपंच से उन्हें उबारें, दें स्थान हृदय स्थल  में। अनन्त काल से मानव  मन अहंकार में, चूर हुआ है, हो कलिकाल के हाथ […]

काव्य ग़ज़ल

फ़िक्र-ए-आवाम

आज कल सियासतदां मुद्दा कम ज्यादा धर्म की बात करते हैं,  बहुत थोड़े ही अब मुल्क के विकास की बात करते हैं.  दौलतमंदों के लिए वन्दे भारत का इंतज़ाम,  मज़दूर, मज़लूम पर लाठियों का प्रहार करते हैं. इन्हें ज़रा भी नहीं फ़िक्र बेसहारा, बेबस अवाम की,  ये तो सिर्फ मालदारों की इज़्ज़त व एहतिमाम करते […]