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मास्साब का अप्रैल फूल क्वारण्टाइन !

व्यंग्य- मुकेश राठौर    देश में अनेकों धार्मिक और राष्ट्रीय पर्व मनते रहते हैं |अब तो राजनैतिक पर्व मनने लगे हैं |लंबे समय तक कोई सेलिब्रेशन न हो तो हम बीमार से हो जाते हैं |सब पर्वग्रही होते है |कुछ लोग भूखे पेट तो कई खाकर-पीकर लोकतंत्र का महापर्व भी मना लेते है |इतना ही […]

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*वसुदेव कुटुंबकम और कोविड 19 के साइड इफेक्ट*

व्यंग्य मख्खनलाल  भिया आज फिर हाफ़ते हाफ़ते द्वार पर आ खड़े हुवे। जब भी कोई संकट गहराता है। वे ऐसे ही इंट्री मारते है। हाँ एक बात है, संकट उनका  अपना कभी नही होता । सदैव  देश दुनिया के संकट को लेकर आते। वह अपने आप को, सबसे बड़ा, समाज सेवी, राजनीतिज्ञ,समाधान कर्ता समझता। चर्चा […]

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मूर्ख दिवस

                               एक अप्रैल यानी मूर्ख दिवस  पर बहुत लोग दूसरे लोगों को मूर्ख बनाने के प्रयास में लगे रहते हैं । उनमें कई लोग इसमें सफल भी होते हैं। लेकिन उन लोगों के बारे में क्या राय बनाई जाए जो खुद ही खुद को मूर्ख साबित करने में पूरी शिद्दत से लगे रहते हैं। ऐसा […]

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“कोरोना वायरस या अन्धो का हाथी।”

व्यंग्य शरद जोशी का एक नाटक है अन्धो का हाथी जिसमे हाथी के बारे मे अपने अपने अनुभव सबके होते है कोई कहता है लम्बी रस्सी तो कोई दिवारनुमा किसी को खम्बानुमा तो किसी को सुपडे के आकार का हाथी नजर आता है सबका अपना अनुभव  अपनी कल्पना अपना सा बयान होता है।     विश्व […]

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मज़दूर की मजबूरी

जिन मजदूरों ने अपने खून पसीने से दिल्ली को बड़ी बड़ी बिल्डिंगें दी, ओवरब्रिज दिए, शानदार रस्ते ओर घर दिए आज उसी दिल्ली ने उन्हें बेघर कर दिया केजरीवाल सरकार की नाकामी कहें या इन मजदूरों की बदनसीबी.! इंसान कितना स्वार्थी बन गया है जब तक आपको उनकी जरूरत थी तब तक पाला, आज हालात […]

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सच्ची तीर्थयात्रा

एक संन्यासी को एक बार एक दुकानदार ने नौकरी पर रख लिया। संन्यासी से उसने कहा भी कि दुकान है, नौकरी पर रहोगे, तो कहीं बिगड़ जाओ। संन्यासी ने कहा कि बिगड़ने का डर होता तो नौकरी स्वीकार नहीं करता। में इतने सस्ते में संन्यास नहीं छोड़ दूंगा। लेकिन ध्यान रखना, मेरे सानिध्य में कहीं […]

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चकला,बेलन और पुलिस का डंडा !*

व्यंग्य                                             घण्टों मोबाइल में घुसे हुए अपन अक्सर गुनगुनाते थे-प्यार के लिए चार पल कम नही थे ,कभी तुम नही थे,कभी हम नही थे |मग़र आज तुम भी हो,हम भी है और चार पल या चार दिन नही बल्कि पूरे- पूरे इक्कीस दिन हैं |ऊपर से टोटली सोशल डिस्टेंसिंग बिल्कुल हम-तुम एक कमरे में […]

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संकट में है अख़बार, भविष्य अधर में*

✍🏻 *डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’* ‘एक समय आएगा जब अख़बार रोटरी पर छपेंगे, संपादकों की ऊँची तनख्वाह होगी, पर तब संपादकीय संस्थाएँ समाप्त हो जाएँगी।’ ऐसी बात आज़ादी के पहले बाबू विष्णु पराड़कर जी लिख गए जो आज अक्षरश: सत्य नज़र आ रही है। आज संपादकीय संस्थान तो विज्ञापन या कहें सर्कुलेशन विभाग के मुनाफ़े […]

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कोरोना भगाओ यज्ञ का आयोजन

 (व्यंग्य)   फिलहाल हम लोग कोरोना को भगाने के लिए अपनी कालोनी में आध्यात्मिक प्रयास बहुत तेज कर दिए हैं। पूजा-पाठ निरन्तर सबके घरों में दिन-रात हो रहा है। घर-घर से चंदा मांगा जा रहा है। इस चंदे से हम लोग एक विशाल यज्ञ का आयोजन शीघ्र ही करने जा रहे हैं। इस यज्ञ में, […]

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आंसू आ गए आज का जनता कर्फ्यू को देखकर

 जनता कर्फ्यू पर , त्वरित टिप्पणी ””” कमाल का देश मेरा भारत महान भारत देश की जनता को कोटि कोटि प्रणाम आज इस कि जनता ने ये साबित कर दिया कि हम सब संकट की घड़ी में एक साथ है अपील किसने की, ये मायने नहीं रखता लेकिन किसके लिए ये बहुत कमाल की बात […]