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व्यंग्य–(देढ़ दर्जन बच्चे और तुफैल के अब्बू)

हमारे गाँव जवार में तुफैल के अब्बू और अम्मी  परिवार नियोजन की ऐसी-तैसी की एक मिशाल बन गये है. इन दोनो की घनघोर और सुनामी मोहब्बत से अब तलक इनके इस कुटीर और लघु-उद्योग में सत्रह बच्चो ने इन्हें अम्मी और अब्बू कहने का कार्यभार संभाल लिया है. इनकी मोहब्बत का ये उर्वरापन यूहीं नही […]

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युवाओं को रोजगार देना ही होगा

बदलते वक्त की रफ्तार इतनी तेज है कि उनको पकड़ कर चल पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। यह जो नई पीढ़ी जवानी की दहलीज पर खड़ी है वह विगत की तमाम मान्यताओं से अनजान ही नहीं है। उन्हें वह बेकार अनुपयोगी और मिथ्या लग रही है। वह किसी पार्टी किसी सिद्घांत किसी नेता […]

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जितना अधिकार इंसानों का है उतना अधिकार पक्षियों का भी है

ग्लोबल वार्मिग के बढ़ते प्रभाव के कारण कई पक्षियों की प्रजातियां धीरे -धीरे विलुप्तता कगार पर पहुँच रही है | जोकि चिंता का विषय है| इससे पर्यावरण भी प्रभावित होगा | इसके लिए वातावरण में परिवर्तन आवश्यक है | साथ ही सामाजिक स्तर से भी प्रयास किये जाना होंगे | वन्य जीव संरक्षक के उदेश्यों […]

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तेरी,मेरी,तेरी-मेरी,तेरी,मेरी कहानी !

                                       मेरा दूर का मित्र मांगीलाल खाने-पीने,घूमने-फिरने,पहनने-ओढ़ने का बड़ा शौकीन हैं | जैसे ही कोई नया-पुराना मुर्गा फंसा, हफ़्ते में पेट पूजा की एकाध बैठक हो ही जाती हैं |धार्मिक यात्रा के नाम पर सैर-सपाटे के लिहाज से मासिक मिनी टूर व त्रैमासिक मेगा टूर हो ही जाते हैं |समयानुकूल वह ठंडे/गर्म कपड़े,रैन कोट/समर कोट […]

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अभिव्यक्ति

*●व्यंग्य●मंत्री जी मजे में है !*                                                                    मंत्रीजी खाने में रहे, थाने में रहें या फ़िर कही और…! मंत्री जी मौजूदा हो या फ़िर भूतपूर्व ,मंत्रीजी आख़िर मंत्रीजी होते हैं |मंत्री पद भी बड़े कमाल की चीज़ हैं |अनेकों के बीच बहुत और बहुतों के बीच थोड़े ही लोग होते हैं जिन्हें मंत्री नाम मिलता हैं […]

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*व्यंग्य

लगान माफ़ी के वो दस दिन !*                                                                      एक समय की बात हैं |बरसों पहले बदलापुर गांव की बदहाली से नाराज़ किसानों ने ‘राजा साहब’ को सबक सिखाते हुए ‘सुराज’ का सपना बुना |कुछ बरसों में बदलापुर में बहुत कुछ बदल भी गया था |मगर कहा गया हैं कि -माखी गुड़ में गड़ी रहे,पंख रह्यो […]

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सभी को याद है अब भी गुले नग़मा।

विनम्र श्रद्धांजलि फ़िराक़ गोरखपुरी 28.08.1996–13.03.1982 अजब जादू भरे अश्आर के ख़ालिक़, हमीद कानपुरी फ़िराक़ गोरखपुरी की शायरी में गुल-ए-नगमा, मश्अल, रूह-ए-कायनात, नग्म-ए-साज, ग़ज़लिस्तान, शेरिस्तान, शबनमिस्तान, रूप, धरती की करवट, गुलबाग, रम्ज व कायनात, चिरागां, शोअला व साज, हजार दास्तान, बज्मे जिन्दगी रंगे शायरी के साथ हिंडोला, जुगनू, नकूश, आधीरात, परछाइयाँ और तरान-ए-इश्क जैसी खूबसूरत नज्में […]

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सुख और दुख तो आते और जाते हैं

आज  इंसान हर  सुख सुविधाओं में जीवन यापन कर रहा है, फिर भी तनाव बेचैनी दुख में रहता है|सब कुछ है फिर भी इच्छाएं उसे समस्याओं में जकड़े रहती है, जिसके कारण वो जीवन का आनंद न लेकर बेचैनी और तनाव में रहता है| सुख और दुख तो आते और जाते हैं |अगर यह हमेशा […]

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दूषित राजनीति दूषित लोग

आज हम भारत की राजनीति की बात करें तो वह पूरी तरह दूषित हो चुकी है।इसके लिए हम किस को जिम्मेवार ठहरा है।कुछ समझ नहीं आता मगर वास्तव में हम विचार करें तो दूषित राजनीति के लिए हमारा भारतीय संविधान ज्यादा जिम्मेवार है और कुछ हम खुद भी। राजनेताओं के लिए कड़े कानून नहीं बनाएंगे,जिसका […]

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मासूम सा सवाल, मासूम सी जिंदादिली

कश्मीर की आज़ादी, 370 का हटना, 35ए का समाप्त होना, कश्मीरियत का हिंदुस्तानी तिरंगे में लिपट-सा जाना, चश्म-ए-शाही का मीठा पानी देना, झेलम का बासंती उफान, चिनार का खुशियाँ मनाना, चीड़ और देवदार  का  झुक-सा जाना, डल का केसरिया बाना, कानून का एक-सा हो जाना, जब जायज है, पर उससे भी अधिक आवश्यक है हिंदुस्तानियों […]