साहित्य

जैसे मति वैसी गति

लघुकथा आज भी शेर खान देर से घर आया । वह काफी हताश लग रहा था । परन्तु ये क्या,,,, आदमी अगर थका हो या हताश हो और ऊपर से रात्रि का समय हो तो वह उस कार्य को दूसरे दिन पर टाल देता है । परन्तु शेर खान पर शिकार का भूत सवार था […]

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आम आदमी की व्यथा झलकाती है लघु पच्चीसी

पुस्तक समीक्षा लेखिका … डॉ अल्पना आर्या गंगा पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स इंदौर पुस्तक मूल्य …१०० रू डॉ अल्पना आर्या की इस कथासंग्रह में उनकी 25 कथाएं है।इस कहानी संग्रह में लेखिका ने अपने आसपास के परिपेक्ष्य को अपनी लेखनी के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है कि जो बरबस ही पाठको को अपने […]

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(अब समय आ गया है

लघुकथा सीमा को लगता था की एक उम्र के बाद बेटी की माँ को संभल जाना चाहिए भले उम्र ना हुई हो पर आम छुअन ओर गंदी मानसिकता वाली छुअन में फ़र्क होता है ये बच्ची को समझ में आना चाहिए, कुछ क्रियाएं सामान्य नहीं होती ये समझाते सीमा पिंकी को फ़र्क समझा रही थी […]

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– “माँ जल्दी चलो खेत में! आग लग गई वहाँ”- “कुछ भी बोलता रहता है मुरख.. चल हट काम करने दे।”

लघुकथा – “नहीं माँ!  मैं सच कह रहा हूँ। चलकर देखो तो सही।”दोनों माँ बेटे सरपट दौड़ते हुए खेत की ओर जाते हैं। वहां देखा तो सचमुच आग की लपटें भभक रही थी। गेहूँ की फ़सल जलकर जैसे राख हो गई। गाँव के लोग पास के तालाब से पानी लाकर उड़ेलने लगे… मगर तब तक […]

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नीलेश मिसरा और र सुधांशु राय की चार कहानियां

हमारी जिंदगी में ऐसे पल भी आते हैं जब हम बेहद निराश हो जाते हैं और यहां तक कि अपने यार-दोस्‍तों के चुटकुलों पर भी एक फीकी मुस्‍कान तक हमारे होंठों पर नहीं आ पाती।  चार जोरदार और प्रेरक कहानियां  सुना रहे हैं जाने-माने स्‍टोरीटैलर्स नीलेश मिसरा और सुधांशु रायये सभी कहानिया यू ट्यूब पर […]

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गर्मी में ठंडा अहसास कराती माँ, जाड़े में कुनकुनी धूप बन जाती माँ

मात–पिता तुम मेरे शरण गहूँ किसकी… इन्सान तो क्या देवता भी आँचल में पले तेरे है स्वर्ग इसी दुनिया में कदमों के तले तेरे ममता ही लुटाये जिसके नयन, हो… ममता ही लुटाये जिसके नयन ऐसी कोई मूरत क्या होगी ऐ माँ, ऐ माँ तेरी सूरत से अलग भगवान की सूरत क्या होगी, क्या होगी […]

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घंटी ने प्यास बुझाई

लघुकथा सुबह के समय  संन्नाटा इतना गहरा था केवल चिड़ियों ‌‌‌‌का   कलरव  सुनाई दे रहा था । लेकिन घर की खिड़की पर खड़ी   सोच रही थी कि चिड़ियों कि मधुर आवाज भी अब  मन को  शांत नहीं कर पा रही है  ।  पंद्रह दिन से   खिड़कियों से झांकते मासूम चेहरे अब शोर नहीं कर रहे […]

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पुस्तक समीक्षा

बिखरे मोती के दानों को *पिरो पाई जीवन के आखरी *पड़ाव में —————– पुस्तक का नाम–  “ठूंठ  से झाकती                          *कोपलें “                         —————- लेखिका-श्रीमती सरला मेहता ——————– प्रकाशन—शुभसंकल्प  प्रकाशन ———————– मूल्य-120 रु —————- सरला मेहता जी द्वारा  लिखित पुस्तक ‘ठू ठ  से झांकती कोपले ‘  कविता संग्रह हाल ही में  प्रकाशित  हुआ है।इस संग्रह […]

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जिम्मेदारी

लघुकथा   ‘आज तीसरे दिन भी बाजार बंद है।’  वह अपने घर के सामने ठेले में चेन लगे पहिए को देखता है। उस ताले को खोलता, आसपास नज़रे दौड़ाता, सन्नाटा पसरी सड़को को देख अपने ठेले के पहिए में पुनः ताला लगा देता। गली, मोहल्ला, बाजार बन्द, लोगों की आवाजाही भी बंद है। यह देखकर  […]

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लघुकथा

माता तारा रानी सिंधवा माता भगवती आदिशक्ति तारा का बहुत बड़ा भक्त था। परन्तु उनका पानी ग्रहण संस्कार सुशील नाम की एक दुर्व्यवहार से युक्त कुटिल स्त्री के साथ हुआ।  बहुत वर्ष बीत गए विवाह को परन्तु उनके यहां किलकारियां नहीं गूंजी अर्थात कोई संतान नहीं हुई।  माता तारा की अपार कृपा से एक दिन […]