काव्य ग़ज़ल

आखिर क्यों??

बहन, मां, बेटी हो तुम, पत्नी और प्रेयसी हो तुम। तुम ही गीता ,रामायण हो, तुम ही सृष्टि की तारण हो। कितने किरदारों में ढलती हो? फिर क्यों अबला बन फिरती हो तुम सुमन किसी फुलवारी की, तुम जननी किसी किलकारी की। आंचल में ममता की धार है, चुनौतियां भी सभी स्वीकार हैं। फिर क्यों […]

काव्य ग़ज़ल

तिरंगा

तिरंगा शान है हम हिदुस्तानियों की जान है कितने वीरों ने तिरंगे की खातिर लुटा दी थी जवानी ऐसे थे हमारे भारत के वीर क्रांतिकारी हिन्दुस्तानी राष्ट्रध्वज का हम सब मिलकर करते सम्मान हैं इसका सम्मान करना ही हम सबकी पहचान है तिरंगा शान है हम हिदुस्तानियों की जान है तिरंगा हमारी जान है , […]

काव्य ग़ज़ल

राणा प्रताप का आत्मसम्मान

राणा  प्रताप  ने  मान  हेतु  ही भव्य  महल  को  त्यागा  था। बीहड़   कानन   में  रहकर  के जीवन  सकल   बिताया  था।                 भाँति-भाँति के पकवानों अरु                 सोमपेय    सब    वारा   था।                 घास-फूस  की  रोटी  खाकर                 नदजल  कण्ठ   उतारा  था। मणि, मुक्ता,  मोती  से जकड़े वसन,   गात   से   छोड़े  थे। तन  ढकने  को द्रुम-झाड़ी से […]

काव्य ग़ज़ल

इन्तहान

कदम कदम पर जिंदगी इन्तहान लेती है कभी कभी जिंदगी ही जान लेती है उम्र सैकड़ों वर्ष तो क्या फ़ायदा जिसमें नाम कुछ न कमाए नाम जितनी ही कम उम्र में ज्यादा  कर सके उतना कमाए लिखीं जिंदगी की अनेक कहानियाँ शामिल हैं उसमें कई  दुश्वारियाँ वक्त नहीं है वक्त जाया नहीं करेंगे जिंदगी रही […]

काव्य ग़ज़ल

नेताजी सुभाष

नाम   तुम्हारा   था  सुभाष हिंदोस्ता को था बहुत आस तुमने किया हिमालई प्रयास बिना लिए एक  मिनट सांस स्वतंत्रता  थी  बिल्कुल पास चल  रहा  था  अंतिम प्रयास नियति  को  नहीं आया रास रब ने बुला लिया अपने पास जय हिंद का  किया  आगाज गूंजता रहा है  यह नारा आज खून  के  बदले  आजादी  दी अंग्रेजों  […]

काव्य ग़ज़ल

गणतंत्र दिवस

—————— गणतंत्र का सत्तरवाँ साल उमंग उत्सव वेमिशाल जोश से भरे चेहरे खिले तिरंगा देख मौज मस्ती करते मिले। जनतंत्र का यह गणतंत्र दिवस रखता है खास महत्व समरसता को संजोकर सपनो में खड़ा रहता है अड़िग आड़म्बर। कभी न डगमगाने देता कभी भी न बहकने देता जरा सी गुस्ताखी करने वालो की हमेशा औकात […]

काव्य ग़ज़ल

◆ पुनर्जन्म◆

पेड़ की पीली हो गई पत्तियों ने मेरी ओर मुस्करा कर देखा और पूछा – मौसम बदल रहा है यह पेड़ भी गिरा ही देगा हमें नव किसलयों के स्वागत में क्या तुम भी टूट कर बिखरना जानते हो ? यही है प्रकृति का  शाश्वत नियम प्राचीन की विदाई ही  नवीन का स्वागत है जीवन […]

काव्य ग़ज़ल

हिन्दी मिठी बोली है●●

हिन्दी मिठी बोली है कोयल  सुन्दर स्वर जैसी है यह एकता से परिभाषित है एकता का गान यह गाती है । हम जहाँ भी जाये विश्व भ्रमण में यह वही उपस्थित रहती है अपनत्व, प्रेम, सद्भाव के खातिर सदा यह एकता का गान गाती है। सहज, सुन्दर अनुठी है गंगा-यमुना सी बहती है वेद-शास्त्र, गीता-भागवत […]

काव्य ग़ज़ल

भगाते सर्दी

रवि उदय धूप निकली मरियल, घर से निकले लोग सेंकते हाथ पांव भगाते सर्दी गुनगुनाते गीत अच्छा है ठंड़ा मौसम। वाह…….! इकट्ठे होते लोग करते बातें अपनी तुम्हारी मौसम की आज की कल की मधुरता मन जगाकर।         परिचय अशोक बाबू माहौर ग्राम – कदमन  का पुरा, तहसील – अम्बाह, जिला – मुरैना(म. प्र.) 476111 […]

काव्य ग़ज़ल

शत-शत नमन हमारा

भारत के वीर जवानों को स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों को शत-शत नमन हमारा….2 भूख प्यास सब सहनकर सब कुछ त्याग, जेल में रहकर क्रूर यातनाऐ, जेल में सहकर और खुद को मिटाकर आजादी का जश्न दिया, ऐसे आजादी के दीवानों को शत-शत नमन हमारा….2 सत्य, अहिंसा, प्रेम, धर्म का जिसने पाठ पढ़ा दिया अपनी लाठी के […]