काव्य ग़ज़ल

आदिवासी होना …

आदिवासी होना हर किसी की औकात नही छल प्रपंच, लालच विलासयुक्त मस्तिष्क में वो प्रकृति रक्षक आदिवासी का भाव नही “जुवार माता” का वचन निभाने की जिसमे औकात नही जुवार माता उसमे आदिवासी का वो स्वाभिमान नही हाँ आदिवासी होना हर किसी की औकात नही जिसमें सिंह को झुकाने का साहस नही जिसमे एकलव्य सा […]

काव्य ग़ज़ल

प्रेम व मानवता #

मोहन हो या हम हो करीम, बस! फ़र्क है हमारे नाम। सबसे पहले हम नेक बनें, मुजलिमों के आए काम।। मंदिर मस्जिद दोनों ही, जगह होती जहाँ इबादत। हम एक दूजे के साथ रहे, टूटेगी न हमारी ताकत।। सद्भावना व समरसता में, अलौकिक होता अनुराग। जीवन का सही मायने है तब, दूजे के लिए करें […]

काव्य ग़ज़ल

कविता

या तो कहना मानो,नहीं तो तुम्हारी  मर्जी। कवि युगराज जैन एक दोस्त ने दूसरे दोस्त से कहा मुझे मेरी किस्मत पर दया आती है, साथ साथ होते हुए भी मुझे एक वक्त की ही रोटी मिल पाती है , सुनकर दोस्त बोला की एक वक्त की रोटी मिल रही है ये क्या है कम, दोनों […]

काव्य ग़ज़ल

चल अब अमन – शांति की बात करते हैं

चल अब अमन – शांति की बात करते हैं ना मैं हारा, ना तु जीता चल अब अमन की बात करते हैं। खत्म हुआ मुद्दा भी राजनीति का एक बड़ा चल अब शांति की बात करते हैं । एक सी तो मिठास है मेरे दिवाली की मिठाई और तेरे ईद की सिवइयां में चल अब […]

काव्य ग़ज़ल

यह कैसी तकरार है ..

दोनों ही समझदार है , आपस में सहकार है , दोनों एक नाव पे सवार है,  फिर यह कैसी तकरार है ?  जनता ने युति को किया मतदान , विश्वास को मत तोड़ना बनकर नादान , वर्षों से एक म्यान में दो तलवार है , फिर यह कैसी तकरार है ? क्या मतदाता का मत […]

काव्य ग़ज़ल

मेरे राम आएंगे

अंधकार को दूर भगाएंगे दुनिया को ज्ञान रूपी पाठ पढ़ाएंगे।। सत्य की जीत होंगी फिर असत्य के मुख पर कालक होंगी हर किसी को धर्म से अवगत कराएंगे मेरे राम लल्ला आएंगे।। भाई-भाई को लड़ने से बचाएंगे उन्हें ज्ञान की राह बतलाएँगे मेरे राम आएंगे।। फिर राम राज आएंगा फिर घरों से ताले हट जाएंगे […]

काव्य ग़ज़ल

फैसले का सम्मान करो

अभिमानी का मान हरेंगे। अब मन्दिर में राम सजेंगे। होगी खुशियां देव दीवाली में। मंदिर बनेगा राम की नगरी में। दुष्टों का अब मान घटेगा। अब मन्दिर निर्माण बढेगा।। होगी राम लला की गूंज हर गली और मोहल्ले में। राम सजेंगे जन्मभूमि में राम रहेंगे अवधपुरी में।। होगा तीन महीने में मंदिर निर्माण। फैसला आया  […]

काव्य ग़ज़ल

डाकिया

डाकिया.. हूँ … मैं जी भर सुनी ..तुम्हारी .. गाथा भीगे शब्दों ..के ..ताने बाने में बुनी                    दिलचस्प … सी भूल ही गया .. बाँचना है..किसी को तुम खो गए … मैं भी .. मगन हुआ सुनता … रहा … किस शिद्दत से .तुम्हें .. इंतजार .. होगा जवाब . ..का . . वो खत […]

काव्य ग़ज़ल

*क्योकि मंदिर हम वही बनाएंगे*

*मंदिर 🎪हम अब वही बनाएंगे…… आज का सूर्य जब आया खुशिया ही खुशिया लाया,, राम पधारे अवध में अब भगवा घर घर लहरायेगे….. सारी दिशाएं महक रही हे वृक्षों पे चिड़िया चहक रही हे,, छटा हुई आज अवध की निराली राम धुन अब गाएंगे….. आनंद की लहरे यू बह रही हे मंद सी मुस्कान लबों […]

काव्य ग़ज़ल

ग़ज़ल

काम कर  ये बड़ा  आशिक़ी  के लिए। छोड़ दे कुल जहां अब किसी के लिए। चाहता  हूँ  जिसे  अब मिले  वो सनम, है  ज़रूरी  बहुत   ज़िन्दग़ी   के  लिए। काम  कोई  भी  हो  आज के  दौर में, गै़र  मुमकिन  नहीं  आदमी  के लिए। लफ्ज़  ही   जोड़  लेना  नहीं  शायरी, भाव  अच्छे  रखो   शायरी  के  लिए। काम […]