काव्य ग़ज़ल

हर शख़्श अब परेशां क्यों है..

पूरे देश मे लॉक  डाउन … हर बंदा अपने घर मे , अरे अपने ही घर में, अपने अपनों के साथ में  , पूरी तरह आज़ाद, ना आफिस  जाने की जल्दी, ना काम का बोझ, ना पेंडिंग फाइल्स, ना बॉस की डांट, ना गाड़ी में पेट्रोल का ख़र्च, ना सड़क पर जाम और प्रदूषण से […]

काव्य ग़ज़ल

वो दिन आएगा

ज़ख़्मे – जिगर ना देखो हमारा , आपकी आरज़ू को अपना ख़्वाब बना लिया ‌। अपने दिल के हर एक पन्ने को  आपकी यादों की किताब बना लिया । उम्मीद पे आपकी एक जहां बसाया है  आप आओ या  ना आओ हमें तो हर सांस में लगता है  आप का पैग़ाम आया है । जब […]

काव्य ग़ज़ल

कोरोना -पापों की अति की इति

मुकमाटी महाकाव्य आचार्य श्री विद्यासागरजी द्वारा रचित ,से ली गई ये पंक्तियां – और ,यह भी इक अकाट्य नियम है कि अति के बिना , इति से साक्षत्कार संम्भव नही है,और इति के बिना अथ का दर्शन असंम्भव!! अर्थ यह हुआ कि, पीड़ा की अति ही, पीड़ा की इति है। और पीड़ा की  इति ही […]

काव्य ग़ज़ल

हसरत

हसरत है दिल  में तुम्हें  पाने की,  कुछ पल तेरी ज़ुलफ़ो के साए मे बिताने की ।  तेरी   निगाहें-जमाल जो पड़ जाए मुझ पर ,  बीमारे-इश्क को करार आ जाए ।   ए सादग़ी-ए-हुस्न की मलिका ,  ज़रा पलकें तो उठाईये , तलबग़ार है तुम्हारे नैयनों की मदिरा के,  दो बूँद ही सही ग़र मिल […]

काव्य ग़ज़ल

उसका डर…..

वो मुझे अपना कहने से डरती है अपनी शान के आगे झुकने से डरती है कोई दर्द मिला होगा उसे अपनो से इसलिए ग़ैरों को अपना कहने से डरती है कई सवाल अब उसके दिल मे मचलते  है दिल बेचैन है बेक़रार है पर जवाब देने से डरती है मुक़्क़म्मल ख़्वाब ,,वो भी करना  चाहती […]

काव्य ग़ज़ल

घर बनता है

ईंट से,पत्थरों से या घास और डंडों से घर नहीं बनता सिर्फ मिट्टी से या पहाड़ो को काट देने से घर बनता है एक व्यक्ति के सभी सपनों से उसकी मेहनत से उसके भावनाओं से उसकी दिल के जज़्बातों से सिर्फ़ चाहरदीवारी से नहीं बनता सपनों का घर किसी का घर बनता है आपसी मेल […]

काव्य ग़ज़ल

दोहे

विपदा आयी देश पर,हुए देश सब बंद। तनिक वेदना झेल लो,दिन मुश्किल के चन्द।। थोड़ी चतुराई करो,पियो गुन-गुना नीर। कोरोना भगाने का,है अचूक् ये तीर।। माता पथ निहार रही,जो आँखों का नूर। विपदा की इस घड़ी में,वो है घर से दूर।। मत घबराओ आज तुम,इस संकट की रात। थोड़ी सी दूरी रखो, बन  जायेगी  बात।। […]

काव्य ग़ज़ल

कविता

बडे़ बडे़ सब जिन्द हमारे भारत में ।   ————————————— बडे़-बडे़  सब जिन्द हमारे भारत में, बडे़-बडे़ सब चुनिन्द हमारे भारत में, बडे़-बडे़ ज्ञानी-ध्यानी, बडे़-बडे़ अन्तर्यामी, रह गये सब चकित हमारे भारत में, आई विपदा से जो खेल रहे, इसको आगे जो ठेल रहे, जो चाहते पाबंदी फेल रहे, ऐ अक्ल के मारों लब खोलो, […]

काव्य ग़ज़ल

● पूर्ण सत्य●

दोस्त! जब- जब तुम मुस्कराये तुम्हारे कदमों की आहट से हमारे संघर्ष की धार चलती रही पीड़ा के द्वार तक सुलगते अरमानों और बुझते इरादों को हवा दे जाता है यह संघर्ष और दिल पर दस्तक देने लगती है एक क्रांति एक बीज जो बस अंकुरण की चाह रखता है धरती की असीम छाती पर […]

काव्य ग़ज़ल

तेरी मेहरबानी का

तेरी मेहरबानी का हक कैसे अदा हो हम  बेसहारों के अब तुम रहनुमा हो जिन्हें  गा  सकूं  मैं  बज्में – सुखन में तुम  अल्फाजे  सेहरा , नगमे सुरा हो नादान  है  हम , जो  तुमसे  खफा हैं तुम सहरा में  खिलता  गुलसिता  हो एहसास  तेरा , हमें  हर  सांस  में  है तुम सुकूने – आतिश, […]