लेख

चिंतन मनन) त्यागने योग्य अहंकार

एक राजा रात्रि में अपने कक्ष में सोया हुआ था कि अचानक उसे लगा मानों छत पर कोई चल रहा है। सम्राट चिल्लाया, ‘कौन है’? चोर हो या लुटेरे? ऊपर से उत्तर आओ, चुप चाप सो जाओ, न मैं चोर हूं, न मैं लुटेरा हूं, मेरा हाथी खो गया है, उसी को ढूंढ रहा हूं। […]

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तमसो मा ज्योतिर्गमय

तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ज्ञान और कर्म का मनुष्य के जीवन में असाधारण महत्व है इस महत्व के जन्मदाता जो ज्ञान को कर्म रूप में परिणित करने की प्रेरणा देते हैं वो गुरु है दरअसल में ज्ञान का सही रूप में उपयोग ही उसे प्रकाशित करता है उपरोक्त श्लोक का भावार्थ भी […]