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मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रचा इतिहास- अभय दुबे

भोपाल। आजाद भारत के इतिहास में कमलनाथ ऐसे पहले मुख्यमंत्री होंगे जिन्होंने अपनी सरकार बनने के एक वर्ष से भी कम समय में प्रगति के इतने सौपान हासिल किये हैं। कमलनाथ के प्रदेश के अंतिम पंक्ति में खड़े हुए व्यक्ति को प्रथम पंक्ति में लाने का संकल्प अब चरित्रार्थ होता दिखायी दे रहा है। यह बात आज प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अभय दुबे ने कही।
श्री अभय दुबे ने पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है, जिसके 01 करोड़ 86 हजार परिवार अर्थात 05 करोड़ 43 लाख नागरिक ‘इंदिरा गृह ज्योति योजना’ के दायरे में आ गये हैं। इंदिरा गृह ज्योति योजना के माध्यम से मात्र एक रूपये प्रति यूनिट की दर से 100 यूनिट तक बिजली, 150 यूनिट तक खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को उपलब्ध करा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में कुल घरेलू बिजली के उपभोक्ता 1,16,97,880 है।
प्रदेश कांग्रेस की सरकार ने इतिहास रचते हुए सिर्फ दो माह में अपने 01 करोड़ 86 हजार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को इस योजना में शामिल कर लिया है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में सर्वाधिक लाभ इंदौर शहर के 329103 उपभोक्ताओं को, पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में क्रमशः छिंदवाड़ा 343932 और सागर में 333577 उपभोक्ताओं को तथा मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के तहत गुना में 274679 उपभोक्ताओं को इंदिरा गृह ज्योति योजना का लाभ मिला है।
केंद्र की अपर्याप्त सहायता के बावजूद कमलनाथ निभा रहे हैं साथ-
बीते दिनों मध्यप्रदेश जून-सितम्बर के बीच अतिवृष्टि एवं बाढ़ की प्राकृतिक आपदा से बेहद पीड़ित हुआ। ऐसे कठिन समय में अपेक्षा थी कि केंद्र सरकार प्रदेश के किसानों और आम नागरिकों की मदद के लिए आगे आयेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने देश के प्रधानमंत्री को 6621.28 करोड़ रूपये की राहत राशि की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा था।
दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार ने लंबे समय तक पहले तो कोई मदद नहीं की और अब अंततः की भी तो सिर्फ 1000 करोड़ रूपये की। मगर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ दृढ़संकल्पित हैं कि वे प्रदेश के नागरिकों की आर्थिक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद राज्य की निधि से यथोचित मदद करेंगे।
मध्यप्रदेश सरकार ने निर्णय लेते हुए तुरंत 1800 करोड़ रूपये की राहत राशि बांटने के निर्देश सभी जिला कलेक्टरों को जारी कर दिये हैं। जिन जिलों में खेती के नुकसान का पूरा मुआवजा तुरंत दिया जा रहा है, वे हैं-भिण्ड, झाबुआ, श्योपुर, उमरिया, अलीराजपुर, दतिया, मुरैना, बालाघाट, बड़वानी, मंड़ला, सिवनी, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा और कटनी।
जिन जिलों में तुरंत प्रथम किश्त बांटी जा रही है, वे हैं-खरगोन, राजगढ़, शाजापुर, विदिशा, बैतूल, भोपाल, हरदा, सीहोर, छतरपुर, देवास, टीकमगढ़, उज्जैन, गुना, रायसेन, अशोकनगर, रतलाम, दमोह, होशंगाबाद, पन्ना, खंडवा, निवारी, सागर, धार और नरसिंहपुर।
आगर मालवा, मंदसौर और नीमच को पहले भी तत्काल सहायता वितरित की गई थी और अब फिर से इन्हें राहत वितरण के क्रम में शुमार किया गया है।
साथ ही सरकार ने यह निर्देश भी जारी किये हैं कि सभी जिलों में तुरंत आरबीसी के अनुसार लोगों के जानमाल का जो नुकसान हुआ है, उसका भी पूरा मुआवजा वितरित किया जाये।

  • प्रतिशोध-बनाम-प्रयास:-
    पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने पहले तो किसानों के सीने में गोलियां दाग दीं, अब वे चुनाव हारने के बाद से प्रदेश के किसानों के खिलाफ प्रतिशोध की आग में जले जा रहे हैं।
    ज्ञातव्य है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही पिछले रबी सीजन 2018-19 के दिसम्बर माह के आवंटन 3 लाख 70 हजार मीट्रिक टन की तुलना में केंद्र की भाजपा सरकार ने मात्र 1 लाख 65 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति मध्यप्रदेश को की थी और एक कृत्रिम संकट पैदा किया गया, ताकि कांग्रेस सरकार की छवि को धूमिल किया जा सके। मगर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तत्परता से तीन दिन दिल्ली रूककर यूरिया की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करायी।
    प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने फिर रबी सीजन 2019-20 में केंद्र पर दवाब बनाया और प्रदेश के किसानों से प्रतिशोध लेने लगे। मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र से 18 लाख मीट्रिक टन यूरिया की मांग की थी, मगर केंद्र ने 15 लाख 40 हजार मीट्रिक टन ही स्वीकृत किया और अक्टूबर माह में स्वीकृति के अनुसार 4 लाख 25 हजार मीट्रिक टन के एवज में मात्र 2 लाख 98 हजार मीट्रिक टन दिया। नवम्बर माह में 4 लाख 50 हजार मीट्रिक टन की स्वीकृति की तुलना में 4 लाख मीट्रिक टन दिया और वर्तमान दिसम्बर माह की 4.25 लाख मीट्रिक टन की स्वीकृति में अब तक जो रैक पहुंच चुकी है और रास्त में है, कुल मिलाकर 50 हजार मीट्रिक टन दिया है। अपेक्षा है कि दिसम्बर माह में पुराने माह की प्रतिपूर्ति की जायेगी।
    जनवरी माह में 1 लाख 50 हजार मीट्रिक टन तथा फरवरी-मार्च में 25-25 मीट्रिक टन अपेक्षित है।
    मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के चलते मध्यप्रदेश में यूरिया की कालाबाजारी नहीं हो रही है। साथ ही जो सोसायटी और निजी क्षेत्र से खाद वितरण की 60-40 प्रतिशत की व्यवस्था थी, उसे बदलते हुए कल तक 80-20 प्रतिशत किया जायेगा, ताकि प्रदेश के किसानों को कोई असुविधा न हो।
    धर्मेन्द्र 03 दिसम्बर 2019

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