मध्य प्रदेश

भुगतान की व्यवस्था गड़बड़ाई

छतरपुर । जिले भर में समर्थन मूल्य पर किसानें की फसल को खरीदने का काम तो किया जा रहा है लेकिन इनके भुगतान की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। फसल बेचने के 24 घंटे के भीतर भुगतान को खाते में भेजने के सरकारी दावें की पोल खुल रही है। मंगलवार को छतरपुर जिले के ग्राम कर्री खरीद केन्द्र क्षेत्र के ग्राम बरेठी, गुड़पारा, इमलिया, पहरा, पारवा से आए कई किसानें ने कलेक्टर को अपनी पीड़ा सुनाने का प्रयास किया लेकिन कलेक्टर मोहित बुंदस चेम्बर से न तो बाहर निकले और न उन्होंने किसानें की पीड़ा सुनी। तदोपरांत किसानें ने एडीएम को ज्ञापन सौंपकर अपनी फरियाद सुनाते हुए कहा कि कई किसानें की बेटियें की शादियां इसी महीने हैं और उन्हें भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
कलेक्टर कार्यालय में पहुंचे किसान घनश्यामदास तिवारी, मुन्ना अहिरवार, लक्ष्मन अहिरवार, माखनलाल चौबे, नथुआ अवस्थी आदि ने एक शिकायती आवेदन देते हुए बताया कि किसान खेत में मेहनत कर जो फसल उगाते हैं उसे बड़ी मुश्किल से खरीद केन्द्रों पर ले जाकर लाइन में लगकर बेच पाए हैं। कई किसानें ने अप्रैल के महीने में ही अपनी तौल करा ली थी जबकि कुछ किसानें ने मई के पहले सप्ताह में फसल की पूरी तौल करा दी। ग्राम कर्री के खरीदी केन्द्र पर एक दर्जन से अधिक गांवें से आने वाले किसानें ने अपनी फसलें तुलवाई हैं लेकिन लगभग 20 दिन गुजरने के बाद भी किसानें की राशि उनके खाते में नहीं पहुंची है। कुछ किसानें के घरें में शादियां हैं इसलिए उन्हें पैसे की अत्यधिक आवश्यक है इसके बाद भी उनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्हें एक ऑफिस ðसे दूसरे ऑफिस भगाया जाता है जिससे वे परेशान हो चुके हैं।
कलेक्टर चेम्बर के बाहर लगी रही ग्रामीणें की कतार, नहीं निकले बाहर
पिछले 15 वर्षों में शायद यह पहला मौका है जब छतरपुर में कलेक्टर चेम्बर ग्रामीणें के लिए नहीं खुल पा रहा। मंगलवार को जनसुनवाई का दिन होता है यह सोचकर जिले भर से सैकड़ें ग्रामीण विभिन्न समस्याआंð को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। दोपहर करीब एक बजे से तीन बजे तक कर्री से आए किसानें एवं अन्य ग्रामीणें ने कलेक्टर को अपनी फरियाद सुनाने के लिए गेट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियें से गुहार लगाई लेकिन उन्हें कलेक्टर से नहीं मिलने दिया गया। कलेक्ट्रेट में ग्रामीणें के आवेदन लेने और उनकी समस्याआंð के निदान के लिए नई परंपरा शुरू हो गई है। अब कलेक्टर ग्रामीणें से नहीं मिलते बल्कि उनके सुरक्षाकर्मी ग्रामीणें को एसडीएम के पास भेज देते हैं। मंगलवार को भी ऐसा ही हुआ जब सुरक्षाकर्मियें ने इंतजार कर रहे ग्रामीणें को एसडीएम से बात करने की सलाह दी।
इनका कहना-
हम सभी किसानें का भुगतान समय पर करने का प्रयास कर रहे हैं। इस मामले में भी जल्द ही भुगतान कराया जाएगा।
एसके रावत, जीएम, सहकारी बैंक, छतरपुर

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