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मुझे मेरा ज्ञान मिल गया इसका नाम ज्ञानानंद महोत्सव है : विशुद्ध सागर

अम्बाह। जैन संत आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का सोमवार को प्रात: 7:00 बजे अंबाह नगर में प्रवेश हुआ इस अवसर पर जैन समाज सहित अन्य लोगों ने पोरसा चौराहे पर संत श्री की भव्य अगवानी की गयी उसके उपरांत नगर भर में शोभायात्रा निकालकर संत श्री को विभिन्न मंदिरों के दर्शन कराते हुए जैन बगीची में ले जाया गया जहां पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत श्री ने कहा कि ज्ञान तो हर जीव को होता है लेकिन जो ज्ञान अपने ज्ञायक की प्रसिद्धि करे वास्तव में वही सच्चा ज्ञान माना जाता है अत: इस प्रवचन शिविर के माध्यम से यदि हम अपने ज्ञान को जाग्रत कर अभेद आत्मा में समा जाएं तो यही हमारा सच्चा ज्ञानानंद महोत्सव होगा जैन संत आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने , ग्रंथादिराज समयसार जी परमागम में बर्णित आत्मा की सैंतालीस शक्तियों पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि इन्द्रिय ज्ञान को ज्ञान मानोगे तो चोर कहलाओगे क्योंकि लक्षण सच्चा नहीं हुआ तो लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा । जैसे दर्पण में काले रंग का संयोग होने पर वह काला दिखता है लेकिन वह काला नहीं होता , वह स्वच्छ ही रहता है उसी प्रकार आत्मा में राग दिखाई देता है लेकिन आत्मा कभी राग रूप नहीं होता है । ज्ञान राग को जानता है यह ज्ञान की ही स्वच्छता है , ज्ञान को विकार रूप अनुभव करना ये उसका तिरस्कार करना है एवं ज्ञान को ज्ञान रूप अनुभव करना ये उसकी महिमा है ।
ज्ञान की माहिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञान को खींच कर स्वच्छ मत करना वह तो स्वच्छ ही है ऐसा स्वीकार करना ही ज्ञानानंद है जो जीव ज्ञेयों में आनंद मानता है उसे ज्ञायक में आनंद नहीं आता मुझे मेरा ज्ञान मिल गया इसका नाम ज्ञानानंद महोत्सव है प्रवचन उपरांत आचार्य श्री का मुरैना की तरफ बिहार हो गया जिसमें जैन समाज की सैकड़ों लोग सम्मिलित हुए।
ईएमएस/चन्द्रबली सिंह / 02 दिसम्बर 2019

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