काव्य ग़ज़ल

JUSTICE_FOR_PRIYANKA*

*ना पुलिस, ना जज,ना कोई सिस्टम को अधिकार दो।*

*क्या करना है! रेप किस्तों का अब पब्लिक पर तुम टाल दो।।*

*ना ले जाओ तुम कोर्ट, कचेरी और नहीं तारीखो पर टाल दो।*

*करने दो बस एक फैसला हमें बीच चौराहे पर इनको टांग दो।।*

*राहुल वर्मा*

*निवासी- बड़वानी*

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