लेख

स्व सहायता समूह का गठन

स्व-सहायता समूह के बारे में जब  बात करते है तो हमारे जेहन में निर्धन लोगो का ख्याल आता

है जो कि  बहुत, ही थोड़ी राशि  बचाते है,अपने समूह में ही कम धनराशि  एक दूसरे को दे पाते है एवं अपनी समस्याओ को स्वयं ही सुलझाते है i

आदिकाल से मनुष्य एकत्रित होकर अपने निकटतम संबंधियों के साथ रहता आया है, परिवार से घर,घर से  डेरा, डेरे से  बस्ती और बस्ती से नगर तक की डगर से हम सब वाकिफ है, आज भी यदि संयुक्त रूप से कोई कार्य निपटाना हो तो हम सभी को साथ में लेकर चलते है I

बांग्लादेश  में निम्नतम  स्तर पर की गई ग्रामीण बैंकिंग ( माइक्रो फाइनेंसिंग) जिसके  जनक  श्री मोहम्मद  युनुस के प्रयासों से आज इस बैंक कि लगभग २६०० शाखायेहै. I

प्रश्न उठता है कि क्या हमारे ग्रामीण इलाको में स्व- सहायता समूह का गठन किया जा सकता है,समूह के गठन हेतु क्या किया जा  सकता है, व हम उनके लिए क्या कर सकते है?  आइये हम देखते है कि स्व- सहायता समूह का गठन कैसे किया जा सकता है ?

बचपन से हम पढ़ते आ  रहे है, अपना हाथ जगन्नाथ  अथवा स्वावलंबी बनो,एकता में बल है व इकट्ठे  है तो खड़े है वर्ना अलग – अलग हम गिरा दिए जावेंगे I हमने वह कहानी भी पढ़ी है की कैसे पक्षियों का वह झुण्ड जो  जाल में फंस जाता है इकट्ठे उड़कर  अपने जाल को कटवाने में समर्थ रहते है और हुम यह भी जानते है कि बहुत सारे तिनको को जोड़ा जाये तो एक मजबूत डंडा बन सकता है जो की  आसानी  से तोडा नहीं जा सकता, जबकि इसके विपरीत  अलᜀᜄᜆᜐᜒ᜖᜘᜜᜞ᜦᜨᜰᜲ᜼᜾ᝂᝄᝌᝎ᝖᝘᝜᝞ᝢᝤᝮᝰ᝸᝺᝾កឈដណថបពរឞឨឬឰឲឺូោំ៊៌។៘០២៪៬៸៼ᨂᨄᨊᨌᨖᨘ᨜᨞ᨨᨪᨮᨰᨸᨺᨾᩀᩈᩊᩎᩒ᩠ᩢᩨᩬᩲᩴ᪀᪂᪊᪌᪔᪖᪚ñ䌜ᡊ伀Ŋ儀Ŋ帀Ŋ愀ᡊ洀ै猀ै䌜ᡊ伀❊儀❊帀❊愀ᡊ洀ै猀ै夀ग अलग तिनको को आसानी से तोडा जा सकता हैI संक्षेप में  स्व सहायता समूह एकता का प्रतीक है, जिसमे समस्याओ को सुलझाने का बल भी है I 

िए अति – आवश्यक है कि हम लोगो को अपने बारे में बताये व उनका विश्वास जीते I गाँवो में बुजुर्गो से बात कर अपने कार्य के बारे में बताये व उनसे सहायता व मार्गदर्शन ले, अपने साथ एक नोटबुक रखे एवं  जहा भी जाते है उनसे की  गयी बातचीत को नोट करे I  जब कभी किसी निर्धन परिवार के यहाँ जाये तो घर की  महिलाओ  से जरुर बातचीत करे और यह जानने कि कोशिश करे कि परिवार का मुख्य मुद्दा क्या है, इसे जरुर से नोट करे, इन परिवारों से मिलते वक़्त हंमेशा इस बात का ख्याल रखे उन्हें जरुर बताये कि आप किसी तरह की  कोई सब्सिडी अथवा उन्हें कोई ऋण या पैसे दिलवाने नहीं आये है, इसे हम एक प्रारम्भिक सर्वे कह  सकते है I हुमे इन परिवारों के पास दोबारा, तिबारा अथवा अधिक बार भी जाना पड़  सकता है और आप इन्हें अन्य परिवारों कि समान समस्याओ से अवगत करा सकते है, इनसे मिलने पर आपको इस बात की  जानकारी मिल सकती है कि कौन –  कौन से परिवार समान समस्याओ से जूझ  रहे है I 

समूहों का गठन कैसे किया जाये ?

जब आप इन परिवारों से बात करेंगे तब आप यह पाएंगे कि एक विशेष दायरे में रहने वाले परिवारों के बीच कूछ समान समस्याए है और जिसके चलते उन सभी के बीच एक प्रकार का सामंजस्य दिखाई पड़ता  है I  जैसे कि :

  • एक ही जाति,धर्म या गौत्र आदि I
  • एक ही प्रकार का जीविकोपार्जन I
  • एक ही पैत्रक गाँव आदि से उत्पतिI
  • एक ही प्रकार के वातावरण में रहन – सहन I
  • लगभग एक ही प्रकार का आर्थिक स्तर I 

इन सभी का विश्लेषण करने पर हमें यह पता लगाने में आसानी होगी कि इनमे कौन- कौनसे परिवार है जिनमे बेहतर सामंजस्य स्थापित हो सकता है I

  •  स्व सहायता समूह का गठन  करते समय हमें इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि हम किस तरह के परिवारों से मिलने जा रहे है ?
  • क्या परिवार के पास पीने का पानी सुलभता से उपलब्ध है?अथवा उसे यह दूर से लाना पढताहै ?
  • क्या महिलाओ को शौच के लिए बाहर खुले में जाना पड़ता  है ?
  • परिवार में कमाने वाले कितने लोग है ?
  • परिवार के बच्चे स्कूल जाते है या नहीं ?
  • परिवार के पास मकान कच्चा है अथवा पक्का ?
  • परिवार में यदि बुजुर्ग है तो उनकी स्थिति क्या है ?
  • परिवार में कोई सदस्य गंभीर अथवा लम्बी बीमारी से ग्रसित है?
  • परिवार में कोई नशे का आदी तो नहीं  है ?
  • क्यां परिवार नियमित रूप से महाजन से कर्ज लेता है ?
  • क्या परिवार दोनों वक्त भरपेट भोजन करता है या नहीं ?
  • परिवार अनु.जाति , जनजाति अथवा पिछड़े वर्ग आदि से तो नहीं I

उपरोक्त प्रश्नों  में से यदि तीन या चार का उत्तर भी हाँ में है तो आप परिवार को निर्धन या गरीब मान सकते है I  

सबसे पहले समुदाय के कतिपय अग्रणी व बुजुर्गो की  एक सभा की  जाये, उनके साथ अपने कार्यकृम व उसके उद्देश्य को साँझा किया जाये, जिससे निश्चित तौर पर हमें समूह के गठन करते वक्त उनका साथ मिलेगा I इसे हम सामुदायिक प्रतिभागिता भी कह सकते है I

                                                                                                                           एस.एस .भाटिया

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